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Educational and Cultural Rights

 का टॉपिक है अनुच्छेद 29 और 30 यानी Educational and cultural rights. दोस्तों आगे बढ़ने से पहले आप से एक छोटी सी गुजारिश यदि आपने अभी तक मेरे चैनल को subscribe नहीं किया है तो प्लीज़ इसको subscribe कर लीजिए और बेल icon को भी प्रेस कर दीजिए, आते हैं पॉइन्ट पर. दोस्तों भारत के संविधान में अल्पसंख्यकों के धार्मिक और साँस्कृतिक हितों की रक्षा के लिए विशेष व्यवस्था की गयी है. संविधान का अनुच्छेद 29 कहता है कि राज्य किसी भी अल्पसंख्यक समुदाय पर कोई संस्कृति नहीं थोपेगा सिवाय इसके स्वयम के. The state shall not impose upon it any culture other than it's own Article 29(1). दोस्तों ,संविधान के अनुच्छेद 30 के अनुसार अल्पसंख्यक समुदाय को अपनी इच्छानुसार शिक्षण संस्थाओं को खोलने और उन्हें संचालित करने की स्वतंत्रता होगी. राज्य द्वारा शिक्षण संस्थाओं को सहायता प्रदान करने की क्रिया में अल्पसंख्यक समुदाय द्वारा संचालित शिक्षण संस्थाओं के प्रति कोई भेदभाव नहीं होगा. अनुच्छेद 30(1A) के अनुसार यदि अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान की सम्पत्ति का राज्य द्वारा अधिग्रहण किया जाता है तो पूर्ण मुआवजा ...

Right to religion under articles 25,26,27 and 28.

 के संविधान के अनुसार भारत एक धर्म निरपेक्ष  है यानी सेकुलर राष्ट्र है जिसका अर्थ य़ह हुआ कि राज्य सभी धर्मों के प्रति तटस्थ और निष्पक्ष रहेगा. एक धर्म निरपेक्ष राष्ट्र की मान्यता होती है कि राज्य की भूमिका मानवीय और सांसारिक मामलों तक ही सीमित होगी और इसका इश्वरीय संबंधों से कोई लेना देना नहीं है. व्यक्ति का इश्वर से सम्बन्ध उसके व्यक्तिगत विश्वास का विषय है. राज्य की दृष्टि में सभी धर्मों का स्थान समान है और राज्य लोंगों के धार्मिक अधिकारों, उनकी  आस्था और अराधना में किसी प्रकार का कोई हस्तक्षेप नहीं करेगा. संविधान के अनुच्छेद 25 से 28  सभी धर्मों के प्रति राज्य की निष्पक्षता को सुनिश्चित  करते हैं. दोस्तों संविधान का अनुच्छेद 25 सभी व्यक्तियों को अन्तःकरण की स्वतंत्रता के साथ-साथ अपने धर्म मानने, पालन करने और उसके प्रचार की स्वतंत्रता प्रदान करता है यानी Freedom of conscience and right to profes, practice and propagate his religion. अन्तः करण की स्वतंत्रता का अर्थ हुआ कि ईश्वर से अपने संबंधों को अपनी इच्छानुसार निर्धारित करना. Right to profes का अ...

Justice KN Wanchoo, A judge without a law degree.

 बात करेंगे एक ऐसे शख्स की जो बिना किसी लॉ की डिग्री के या कानून की बिना किसी औपचारिक पढ़ाई के ही हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के Judge ही नहीं बल्कि भारत के मुख्य न्यायाधीश यानी Chief Justice of India की अत्यंत प्रतिष्ठापूर्ण स्थान को प्राप्त किया. इसकी भी बात करेंगे कि ऐसा कैसे सम्भव हो पाया. दोस्तों आगे बढ़ने से पहले आप से एक छोटी सी गुजारिश यदि आपने अभी तक मेरे चैनल को subscribe नहीं किया है तो प्लीज़ इसको subscribe कर लीजिए और बेल icon को भी press कर दीजिए. दोस्तों हम बात कर रहे हैं भारत के दसवें मुख्य न्यायाधीश श्रीमान कैलाश नाथ Wanchoo की. अपनी विलक्षण प्रतिभा के दम पर सफलता की एक एक सीढ़ियां चढ़ते हुए वे देश के मुख्य न्यायाधीश की कुर्सी पर बिराजमान हुए और देश के सामने एक अनोखा उदाहरण प्रस्तुत किया. सर कैलाश नाथ Wanchoo 24 अप्रैल 1967 को भारत के मुख्य न्यायाधीश बनाए गए और उन्होंने इस पद को 24 फरवरी 1968 तक सुशोभित किया. दोस्तों जस्टिस Wanchoo एक करिअर नौकरशाह थे यानी अंग्रेजों के ज़माने के ICS ऑफिसर. दोस्तों 1924 में ICS की परीक्षा पास करने वाले कैलाश नाथ Wanchoo क...

Cadre आवंटन

 16 मार्च 2024 को सिविल सर्विसेस का रिजल्ट आया जिसमें देश की विभिन्न सेवाओं के लिए 1000 से ज्यादा अभ्यर्थियों का चयन किया गया है उसमें IAS,IPS,IFS के अलावा ग्रुप A और  ग्रुप B के तमाम पद शामिल हैं. दोस्तों परीक्षा का परिणाम आते ही सभी चयनित अभ्यर्थी सीधे सरकारी अधिकारी नहीं बन जाते. य़ह निर्भर करता है उनकी प्राथमिकता,मेरिट लिस्ट में उनका स्थान और उनके द्वारा चयनित राज्य में उपलब्ध पदों की संख्या पर. आइए देखते हैं संघ लोकसेवा आयोग की द्वारा आयोजित civil सेवा परीक्षा में Cadre क्या होता है. Cadre असल में उस विशेष राज्य या केंद्र शासित प्रदेश को कहते हैं जिसके लिए All India Services जैसे IAS,IPS, और IFS के लिए चयनित हुए अभ्यर्थियों का आवंटन होता है यानी Cadre आवंटित होने के बाद ये अधिकारी उन्हीं विशेष राज्यों में काम करेंगे . दोस्तों Cadre आवंटन की प्रक्रिया कई चरणों में की जाती है. भारत के राज्यों को 24 Cadres में विभाजित किया गया है जबकि अपवादस्वरूप तीन संयुक्त Cadres भी हैं जैसे असम-मेघालय का संयुक्त Cadre है उसी तरह मणिपुर-त्रिपुरा का संयुक्त Cadres है और इसके अलावा अरुणाचल प...

अनुच्छेद 23 और 24

 संविधान का अनुच्छेद 23 सभी लोंगों को शोषण के विरुद्ध अधिकार देता है यानी Right against Exploitation. अनुच्छेद 24 फैक्टरी या अन्य घातक उद्योगों में बच्चों के नियोजन को प्रतिबंधित करता है. पहले बात करते हैं अनुच्छेद 23 का. दोस्तों संविधान का अनुच्छेद 23 राज्य द्वारा या अन्य व्यक्तियों द्वारा समाज के कमजोर वर्गों के लोगों के शोषण के विरुद्ध अधिकार देता है. अनुच्छेद 23 का क्लॉज वन कहता है कि मानव तस्करी, बेगार और इसी प्रकार के दूसरे जबरन मजदूरी जैसे मामलों को प्रतिबन्धित किया जाता है और इस प्रावधान का किसी भी प्रकार का उल्लंघन विधि के अनुसार दण्डनीय होगा. क्लॉज टू कहता है कि अनुच्छेद 23 राज्य को सार्वजनिक प्रयोजन के लिए अनिवार्य सेवाओं को लागू करने से रोक नहीं सकता और इन सेवाओं को लागू करने में धर्म  ,वर्ण, जाति, या वर्ग के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होगा. दोस्तों आज भले ही दासता अपने प्राचीन रूप में समाज में दिखाई न देता हो लेकिन य़ह अपने नए रूपों में विद्यमान है जिसे संविधान ने एक समान्य नाम दिया है शोषण यानी Exploitation जो मानव स्वतंत्रता और सभ्यता के लिए एक गंभीर चु...

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 22 और Preventive Detention

संविधान का अनुच्छेद 22 क्या है और Preventive Detentions क्याहै. अनुच्छेद 22 को आवश्यक बुराई यानी Necessary Evil क्यों कहते हैं. .संविधान का अनुच्छेद 22 सभी व्यक्तियों को मनमाने-पूर्ण तरीकों से गिरफ्तारी और हिरासत में लिए जाने से सुरक्षा देता है. अनुच्छेद 22 का  क्लॉज वन कहता है कि किसी भी गिरफ्तार व्यक्ति को उसकी गिरफ्तारी के कारणों की सूचना जितनी जल्दी सम्भव हो दिए बिना उसे हिरासत में नहीं रखा जा सकता. क्लॉज टू कहता है कि गिरफ्तार व्यक्ति को अपनी पसन्द के अधिवक्ता से सलाह लेने और अपना बचाव करने के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता. क्लॉज थ्री के अनुसार गिरफ्तार किए गए और हिरासत में लिए गए व्यक्ति को 24 घण्टे के अन्दर नजदीकी Magistrate के यहाँ प्रस्तुत करना होगा. इसमें गिरफ्तारी के स्थान से कोर्ट तक आने का समय शामिल नहीं है. ऐसे व्यक्ति को बिना Magistrate के आदेश के 24 घण्टे से अधिक समय तक हिरासत में नहीं रखा जा सकता. दोस्तों ये सुरक्षा उपाय विदेशी शत्रुओं और Preventive Detention के अन्तर्गत गिरफ्तार व्यक्तियों को उपलब्ध नहीं होंगे. संविधान के अनुच्छेद 22(2) के अंतर्गत ...

PMLA or Prevention of Money Laundering Act 2002

 PMLA क्या है. य़ह कब और क्यों अस्तित्व में आया. इसका मूल उद्देश्य क्या था और सबसे बड़ा प्रश्न क्या PMLA वास्तव में पैर नहीं सर के बल खड़ा है. दोस्तों आगे बढ़ने से पहले आप से एक छोटी सी गुजारिश यदि आपने अभी तक मेरे चैनल को subscribe नहीं किया है तो प्लीज़ इसको subscribe कर लीजिए और बेल icon को प्रेस कर दीजिए. आते हैं पॉइन्ट पर. दोस्तों जब 2002 में PMLA यानी Prevention of Money Laundering Act  बनाया गया तो इसका उद्देश्य था उस काले धन को पकड़ना जो अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर Drug Trafficking यानी जो नशे के कारोबार से उत्पन्न हो रहा है और इस मात्रा में कि विश्व अर्थव्यवस्था को सीधे चोट पहुंचा रहा है. अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर य़ह भावना व्यापक रूप ले रही थी कि जिस स्तर पर ड्रग्स यानी नशीले पदार्थों का कारोबार काला धन पैदा कर रहा है और वैध अर्थव्यवस्था का हिस्सा बनता जा रहा है कि उससे कई देशों की एकता और संप्रभुता को खतरा पहुंच रहा है.  दोस्तों आइए जानते हैं कि इसकी पृष्ठभूमि क्या है. संयुक्तराष्ट्र संघ ने नशीले ड्रग्स के अंतरराष्ट्रीय कारोबार को गंभीरता से लेते हुए 1988 म...

अनुच्छेद 21,भारतीय संविधान

संविधान का अनुच्छेद 21 सभी व्यक्तियों को जीवन जीने और निजी स्वतंत्रता के अधिकार को सुरक्षा प्रदान करता है .अनुच्छेद 21 के अनुसार No person shall be deprived of his life or personal liberty except according to the procedure established by law. यानी किसी भी व्यक्ति को उसके जीवन और वैयक्तिक स्वतंत्रता से वंचित नहीं किया जा सकता सिवाय विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया के. दोस्तों सीधे तौर पर इसका अर्थ य़ह हुआ कि बिना किसी कानूनी आधार के कोई भी सरकारी संस्था या अधिकारी किसी भी व्यक्ति के वैयक्तिक स्वतंत्रता में हस्तक्षेप नहीं कर सकते. आशय यह है कि किसी भी व्यक्ति के साथ दैहिक ज़ोर जबरदस्ती यानी Physical coercion  नहीं किया जा सकता जब तक कि इस कदम का कोई न्यायिक औचित्य न हो. जब कभी भी राज्य या राज्य के अधिकारी या एजेंट किसी व्यक्ति को उसके निजी स्वतंत्रता से वंचित करते हैं तो उनका य़ह कदम तभी सही ठहराया जा सकता है जब इस कदम का कोई वैधिक आधार हो और विधि द्वारा निर्धारित  प्रक्रिया का सख्ती और ईमानदारी से पालन किया गया हो. यहाँ पर य़ह स्पष्ट करना आवश्यक है कि अनुच्छेद 21 में व...

Right to life and personal liberty

 संविधान का अनुच्छेद 20 कुछ मामलों में अपराध की दोषसिद्धि यानी Conviction for offences के विरुद्ध सुरक्षा की गारण्टी देता है. इसका अर्थ य़ह है कि किसी को अपराधी सिद्ध करने के लिए कोई भी कदम उठाने के लिए कोई भी स्वतंत्र नहीं है. संविधान अभियुक्त को भी स्वयं के बचाव का पूरा अवसर ही नहीं देता बल्कि कुछ मामलों में तो सुरक्षा की गारंटी भी देता है. अनुच्छेद 20 का क्लॉज वन कहता है कि Ex Post Facto विधि निर्माण नहीं किया जा सकता यानी Retrospective Criminal Legislation या पूर्व प्रभावी आपराधिक कानून नहीं बनाए जा सकते. अनुच्छेद 20 का क्लॉज टू कहता है कि Double Jeopardy नहीं हो सकता यानी एक ही अपराध के लिए दो बार दण्डित नहीं किया जा सकता. क्लॉज थ्री कहता है कि Self incriminating यानी आत्म दोषारोपण यानी स्वयम के विरुद्ध साक्ष्य देने के लिए किसी को बाध्य नहीं किया जा सकता है. दोस्तों Ex Post Facto यानी Retrospective यानी पूर्व प्रभावी कानून के विरुद्ध अनुच्छेद 20 के क्लॉज वन में प्रावधान किया गया है जिसके अन्तर्गत य़ह स्पष्ट किया गया है कि किसी व्यक्ति को तब तक अपराधी घोषित नहीं किय...

Freedom of Press

भारत के संविधान में प्रेस की स्वतंत्रता की गारण्टी का कोई अलग से प्रावधान नहीं है. प्रेस की स्वतंत्रता अनुच्छेद 19 क्लॉज 1 में प्रदत्त बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में ही शामिल है. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अर्थ सिर्फ अपने विचारों को व्यक्त करना ही नहीं बल्कि दूसरों के विचारों को भी प्रिन्ट या अन्य माध्यम से व्यक्त करना भी है. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता भी अन्य मौलिक अधिकारों की तरह ही 19(2) के अन्तर्गत तर्कसंगत प्रतिबंधों के अधीन है. समाज के व्यापक हित में राज्य की सुरक्षा, भारत की संप्रभुता एवं अखण्डता, विदेशी राज्यों से मैत्री सम्बंध, अवमानना या किसी अपराध के उकसावे की स्थिति में सरकार कानून बनाकर प्रेस की स्वतंत्रता पर तर्कसंगत प्रतिबंध लगा सकती है. सभी सम्भावित परिस्थितियों में प्रेस को असीमित और निरंकुश स्वतंत्रता प्रदान करना अव्यवस्था और अराजकता को निमंत्रण देने जैसा है. दोस्तों समाचार पत्र वास्तव में अभिव्यक्ति के स्वतंत्रता के माध्यम हैं. विचारों की अभिव्यक्ति की भी अपनी एक सीमा और जिम्मेदारी होनी चाहिए. यदि कोई नागरिक संविधान के अनुच्छेद 19(1) के अन्तर्गत प्र...

अनुच्छेद 19 स्वतंत्रता का अधिकार

 दोस्तों बहुत सारे नकारात्मक अधिकारों के अलावा भारतीय संविधान बहुत सारे सकारात्मक अधिकार भी देश के नागरिकों को प्रदान करता है ताकि संविधान के प्रस्तावना यानी Preamble में दिए गए स्वातंत्र्य के महान आदर्शों को आगे बढ़ाया जा सके. इन्हीं में से संविधान के अनुच्छेद 19 के अन्तर्गत ऐसे मौलिक अधिकार दिए गए हैं जो भारत के प्रत्येक नागरिक को मूल स्वतंत्रता प्रदान करते हैं. दोस्तों वैसे तो मूल संविधान में कुल सात प्रकार के स्वतंत्रता की गारण्टी संविधान दी गयी थी परन्तु 44 वें संविधान संशोधन 1978 के माध्यम से सम्पत्ति रखने और क्रय-विक्रय के अधिकार को समाप्त कर दिया गया परिणामस्वरुप अब वह सिर्फ एक साधारण वैधिक अधिकार है. दोस्तों सम्पत्ति के अधिकार की समाप्ति के बाद अब छह प्रकार की स्वतंत्रता देश के नागरिकों को उपलब्ध हैं. संविधान का अनुच्छेद 19 क्लॉज 1 कहता है कि भारत के सभी नागरिकों को अधिकार होगा पहला वाक और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता यानी Freedom of speech and expressions. दूसरा बिना किसी अस्त्र के शांतिपूर्ण सभा करने का अधिकार यानी Freedom of assembly peaceably wothout arms .तीसर...

अनुच्छेद 18 , Abolition of Titles

 अँग्रेजी शासन के दौरान विदेशी सरकार लोंगों को उपाधियां यानी Titles दिया करती थी भारत के अन्दर अंग्रेजों के प्रति समर्पित एक तबका खड़ा किया जा सके जो अंग्रेजों के प्रति निष्ठावान हो. देश के राष्ट्रवादी नेता य़ह कहकर इसका विरोध करते थे कि ब्रिटिश सरकार अपने साम्राज्यवादी मंसूबों को अन्जाम देने के लिए और सार्वजनिक जीवन को भ्रष्ट बनाने के लिए उपाधियां प्रदान कर रही है. दोस्तों जब आजादी मिलने के बाद भारत का संविधान लागू करने की बात आयी तो सरकार द्वारा उपाधियां प्रदान करने की दुरूपयोगी परम्परा को प्रतिबंधित करने की मांग उठी. परिणामस्वरुप संविधान ने स्पष्ट तौर पर राज्य द्वारा किसी भी प्रकार की उपाधियां प्रदान करने पर प्रतिबंध लगा दिया ताकि सत्ता का दुरुपयोग रोका जा सके.दोस्तों, ध्यान देने वाली बात यह है कि य़ह प्रतिबंध सिर्फ राज्य के विरुद्ध है परन्तु दूसरे सार्वजनिक संस्थाएँ जैसे विश्वविद्यालय पर कोई रोक नहीं है वे अपने विशिष्ट प्रतिभा के धनी लोंगों को उपाधियों से सम्मानित कर सकते हैं और इस उपाधियों का प्रयोग उनके नाम के साथ किया जा सकता है. दोस्तों, राज्य द्वारा मिलिटरी और ...

Article 17

 संविधान की धारा 17 के अन्दर अस्पृश्यता का उन्मूलन किया गया है यानी Abolition  of untouchability. दोस्तों आगे बढ़ने से पहले आप से एक छोटी सी गुजारिश यदि आपने अभी तक मेरे चैनल को subscribe नहीं किया है तो प्लीज़ इसको subscribe कर लीजिए और बेल icon को प्रेस कर दीजिए. आते हैं पॉइन्ट पर. दोस्तों संविधान का अनुच्छेद 17 कहता है कि Untouchability is abolished, and it's practice in any form is forbidden.The enforcement of any disability arising out of untouchability shall be an offence punishable in accordance with law.यानी अस्पृश्यता को समाप्त किया जाता है और किसी भी रूप मे इसका अभ्यास प्रतिबंधित है. अस्पृश्यता से उत्पन्न किसी भी प्रकार की अपंगता को थोपना विधि के अनुसार दण्डनीय होगा. दोस्तों, भारत के महान संविधान निर्माताओं द्वारा भारतीय समाज को अतार्किक,  परंपरागत अंधविश्वासों एवं अनुष्ठानिक मान्यताओं से मुक्त कराने की दूर दृष्टि को अभिव्यक्ति मिली भारतीय संविधान के अनुच्छेद 17 के रूप में. संविधान निर्माताओं को य़ह स्पष्ट था कि देश के लोकतन्त्र और विधि के शासन की व्...

Article 16, Constitution of India

  संविधान के अनुच्छेद 16 का सम्बन्ध है सरकारी पदों पर नियोजन और नियुक्ति से. Article 16 क्लॉज वन स्पष्ट कहता है कि There shall be equality of opportunity for all citizens in the matters relating to employment and appointment for any office under the state.यानी सभी नागरिकों के लिए सरकारी पदों पर नियोजन या नियुक्ति के मामलों में अवसरों की समानता होगी यानी सभी को समान अवसर मिलेंगे. उदाहरण के लिए IAS की परीक्षा में सभी Graduates सम्मिलित हो सकते हैं. अनुच्छेद 16 का क्लॉज टू कहता है कि No citizen shall on the ground only of religion,race,caste,sex, descent and placs of birth or any of them  be ineligible for....... यानी कोई भी नागरिक किसी भी सरकारी पद के लिए सिर्फ धर्म, वर्ण, जाति,लिंग vansh और जन्मस्थान या इनमें से किसी के आधार पर अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता. दोस्तों अनुच्छेद 16(1) स्पष्ट कहता है कि Matters relating to employment and appointments यानी नियोजन और नियुक्ति के मामलों में. इसमें नियुक्ति से पहले और नियुक्ति के बाद की स्थितियां भी शामिल हैं जो कि पूरे नियोजन ...