सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

Cadre आवंटन

 16 मार्च 2024 को सिविल सर्विसेस का रिजल्ट आया जिसमें देश की विभिन्न सेवाओं के लिए 1000 से ज्यादा अभ्यर्थियों का चयन किया गया है उसमें IAS,IPS,IFS के अलावा ग्रुप A और  ग्रुप B के तमाम पद शामिल हैं. दोस्तों परीक्षा का परिणाम आते ही सभी चयनित अभ्यर्थी सीधे सरकारी अधिकारी नहीं बन जाते. य़ह निर्भर करता है उनकी प्राथमिकता,मेरिट लिस्ट में उनका स्थान और उनके द्वारा चयनित राज्य में उपलब्ध पदों की संख्या पर. आइए देखते हैं संघ लोकसेवा आयोग की द्वारा आयोजित civil सेवा परीक्षा में Cadre क्या होता है. Cadre असल में उस विशेष राज्य या केंद्र शासित प्रदेश को कहते हैं जिसके लिए All India Services जैसे IAS,IPS, और IFS के लिए चयनित हुए अभ्यर्थियों का आवंटन होता है यानी Cadre आवंटित होने के बाद ये अधिकारी उन्हीं विशेष राज्यों में काम करेंगे . दोस्तों Cadre आवंटन की प्रक्रिया कई चरणों में की जाती है. भारत के राज्यों को 24 Cadres में विभाजित किया गया है जबकि अपवादस्वरूप तीन संयुक्त Cadres भी हैं जैसे असम-मेघालय का संयुक्त Cadre है उसी तरह मणिपुर-त्रिपुरा का संयुक्त Cadres है और इसके अलावा अरुणाचल प्रदेश, गोवा, मिज़ोरम और केन्द्र शासित प्रदेशों का एक अलग संयुक्त Cadre है AGMUT .पहले इन Cadres में उपलब्ध खाली पदों की गणना की जाती है और उसके आधार पर पदों का बंटवारा सामान्य, ओबीसी,और sc st श्रेणी में किया जाता है. इसके अलावा 30 पॉइन्ट रोस्टर सिस्टम का प्रयोग करते हुए आन्तरिक और बाह्य के रूप आगे फिर बंटवारा होता है. दोस्तों, अभ्यर्थियों के गृह राज्य और गृह राज्य में सेवा करने की उनकी इच्छा को ध्यान में रखकर एक सूची तैयार की जाती है और प्रत्येक अभ्यर्थी को उसके योग्यता सूची में स्थान यानी मेरिट लिस्ट में रैंक के आधार पर एक सीरियल नम्बर दिया जाता है. Cadres को चार श्रेणियों में बांटा जाता है ग्रुप वन, ग्रुप टू, ग्रुप थ्री और ग्रुप फोर जिसमें विशेष राज्य और संयुक्त Cadre भी शामिल होते हैं. अभ्यर्थियों को गिरते क्रम यानी Descending ऑर्डर में प्रत्येक क्षेत्र से Cadre को चुनकर अपनी प्राथमिकता व्यक्त करनी होती है. इसके बाद संघ लोकसेवा आयोग इन प्राथमिकताओं के आधार पर Cadres का आवंटन करता है. 
कुछ विशेष मामलों में अलग प्रक्रिया का पालन किया जाता है जैसे यदि किसी अभ्यर्थी ने अपनी कोई प्राथमिकता व्यक्त नहीं किया है तो य़ह स्वीकार कर लिया जाएगा कि उसकी कोई विशेष प्राथमिकता नहीं है. यदि किसी अभ्यर्थी को उसका इच्छित Cadre नहीं मिल पाता तो उपलब्ध रिक्तियों के आधार पर आवंटन किया जाता है. गृह Cadre का आवंटन योग्यता सूची में स्थान और उपलब्ध खाली पदों के आधार पर किया जाता है. यदि किसी अभ्यर्थी ने गृह Cadre की ईच्छा व्यक्त नहीं किया है तो उसे उसकी प्राथमिकता के आधार पर Cadre का आवंटन किया जाता है 

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

ओस्लो समझौता

कई दशकों से जारी इजराइल-फ़िलीस्तीन युद्ध में एक ऐसा भी वक़्त आया जब दोनों के बीच शांति की नयी उम्मीदें सामने आयीं.  दोस्तों बात 1992 की है जब इजराइल के प्रधानमंत्री यीजाक राबिन ने फ़िलीस्तीन के सामने दोस्ती का हाथ बढ़ाया और फ़िलीस्तीनी नेता यासर अराफात ने भी आगे बढ़कर उस शानदार पहल का स्वागत किया. दोनों ही नेता अपने अपने मुद्दे सुलझाने के लिए सामने आए. इजराइली प्रधानमंत्री यीजाक राबिन ने माना कि  फ़िलीस्तीनी मुक्ति संगठन PLO कोई आतंकवादी संगठन नहीं है बल्कि वे अपना देश चाहते हैं और इसका सम्मान किया जाना चाहिए.  फ़िलीस्तीनी नेता यासर अराफात ने भी सकारात्मक रवैय्या अपनाते हुए इजराइल के स्वतन्त्र अस्तित्व को स्वीकार भी किया और मान्यता भी दी.  दोस्तों आज बात करेंगे 30 साल पहले हुए ओस्लो समझौते की जो फ़िलीस्तीनियों के लिए शान्ति की अन्तिम उम्मींद लेकर आया था पर य़ह फ़िलीस्तीनयों की आशाओं की अन्तिम किरण इजराइली आन्तरिक राजनीति का शिकार हो गयी. उसका परिणाम य़ह हुआ कि वह खूनी संघर्ष जो 1993 में ही खत्म हो जाना चाहिए था वह आज भी उसी निर्दयता के साथ जारी है.  ...

अनुच्छेद 370 पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला और इसका विश्लेषण

संविधान  के अनुच्छेद 370 को खत्म करने के सरकार के फैसले चुनौती दी गई थी सुप्रीम कोर्ट में इस 11 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति के 5 अगस्त 2019 के आदेश को सही ठहराया. सुप्रीम कोर्ट के फैसले का क्या असर भारतीय संघीय व्यवस्था पर पड़ेगा. फैसले के महत्तवपूर्ण पक्ष क्या हैं. केन्द्र राज्य संबंधों का इस पर क्या प्रभाव पड़ेगा. राष्ट्रपति शासन के दौरान राष्ट्रपति की क्या भूमिका होगी. जम्मू और कश्मीर को पूर्ण राज्य के दर्जे के संबंध में फैसले में क्या है.  दोस्तों केन्द्र सरकार ने 5 अगस्त 2019 को जम्मू और कश्मीर से संबंधित संविधान की धारा 370 को समाप्त करने की घोषणा की थी. इस फैसले के खिलाफ 23 याचिकाएं दायर की गयी थीं. जिन पर सुप्रीम कोर्ट में 16 दिन तक सुनवाई चली और सुप्रीम कोर्ट ने 5 सितंबर 2023 को सुनवाई पूरी करने के बाद अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया था. इस संवैधानिक पीठ मे चीफ जस्टिस श्री DY Chandrachurn के अलावा चार और Judges थे Justice SK कौल, जस्टिस संजीव खन्ना  जस्टिस BR Gawai, जस्टिस सूर्यकांत. गृह मंत्री अमित शाह ने 5 अगस्त 2019 को राज्यसभा में जम्म...

क्या होता है Optical फाइबर, कैसे काम करता है य़ह

 ज़न संचार के क्षेत्र में विज्ञान की तरक्की ने आश्चर्यजनक रूप से से आम लोगों के जीवन में क्रान्ति पैदा कर दिया है.आज मोबाइल फोन आम लोंगों की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है. इसके बगैर शायद एक कदम भी चलना मुश्किल है. Corona महामारी के दौरान हम सभी ने देखा कि वह एक चीज जिसने हम सभी को आपस में जोड़कर रखा था वह था इन्टरनेट. आज हाई स्पीड इन्टरनेट की वजह से वीडियो चैट कर सकते हैं, ऑनलाइन payment कर सकते हैं, Classes attend कर सकते हैं  और तो और मीटिंग्स कर सकते हैं. दोस्तों कभी सोचा है ये सब कैसे सम्भव हो पाता है. य़ह सबकुछ सम्भव हो पाता है Optical फाइबर से. य़ह Optical फाइबर वास्तव में है क्या. अखिरकार यह काम कैसे करता है. कैसे सम्भव हो पाता है य़ह सबकुछ.  Optical फाइबर वास्तव में बहुत ही महीन बेलनाकार काँच यानी ग्लास के धागे होते हैं. इनकी गोलाई हमारे आपके एक साधारण बाल के बराबर होती है. ये काँच के धागे आश्चर्यजनक रूप से शब्दों को, चित्रों को, वीडियो, टेलीफोन कॉल या कोई ऐसी चीज जिन्हें डिजिटल सूचना में Encode किया जा सकता है, को लंबी दूरी तक भेज सकते हैं वह भी...