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क्या होता है Optical फाइबर, कैसे काम करता है य़ह


 ज़न संचार के क्षेत्र में विज्ञान की तरक्की ने आश्चर्यजनक रूप से से आम लोगों के जीवन में क्रान्ति पैदा कर दिया है.आज मोबाइल फोन आम लोंगों की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है. इसके बगैर शायद एक कदम भी चलना मुश्किल है. Corona महामारी के दौरान हम सभी ने देखा कि वह एक चीज जिसने हम सभी को आपस में जोड़कर रखा था वह था इन्टरनेट. आज हाई स्पीड इन्टरनेट की वजह से वीडियो चैट कर सकते हैं, ऑनलाइन payment कर सकते हैं, Classes attend कर सकते हैं  और तो और मीटिंग्स कर सकते हैं. दोस्तों कभी सोचा है ये सब कैसे सम्भव हो पाता है. य़ह सबकुछ सम्भव हो पाता है Optical फाइबर से. य़ह Optical फाइबर वास्तव में है क्या. अखिरकार यह काम कैसे करता है. कैसे सम्भव हो पाता है य़ह सबकुछ.
 Optical फाइबर वास्तव में बहुत ही महीन बेलनाकार काँच यानी ग्लास के धागे होते हैं. इनकी गोलाई हमारे आपके एक साधारण बाल के बराबर होती है. ये काँच के धागे आश्चर्यजनक रूप से शब्दों को, चित्रों को, वीडियो, टेलीफोन कॉल या कोई ऐसी चीज जिन्हें डिजिटल सूचना में Encode किया जा सकता है, को लंबी दूरी तक भेज सकते हैं वह भी प्रकाश की गति से. काँच के ये बहुत ही महीन धागे जाहिर है बहुत
कमज़ोर होते हैं लेकिन यदि इन्हें सही तरीके से बनाया जाए रक्षा कवच के साथ तो इनका ईस्तेमाल लंबे समय तक किया जा सकता है.  सही वैज्ञानिक तरीकों की मदद से बनाने पर काँच या ग्लास के ये महीन धागे मजबूत, हल्के और  लचीले बन जाते हैं. इसके साथ ही इन्हें ज़मीन के अंदर गाड़ा जा सकता है, पानी के अंदर से ले जाया जा सकता है और तो और इन्हें लटाई में लपेटा भी जा सकता है. दोस्तों,अब से करीब 60 साल पहले जाने माने भौतिक विज्ञानी चार्ल्स Kaw ने विचार व्यक्त किया कि जल्द ही ताँबे की तारों की जगह ग्लास फाइबर का इस्तेमाल किया जायेगा जो कि ज़न संचार का एक बहुत ही बेहतरीन माध्यम होगा. हालाँकि उस समय लोंगों ने उनकी बात को बहुत महत्व नहीं दिया लेकिन आज उनकी भविष्यवाणी एक बहुत बड़ी सच्चाई है. 2009 में इस महान भौतिक विज्ञानी श्री चार्ल्स Kaw को Physics में उनके योगदान के लिए उन्हें नोबल पुरस्कार से सम्मानित किया गया. दोस्तों अब बात करेंगे कि ये Optical फाइबर काम कैसे करते हैं. प्रकाश एक Electromagnetic तरंग है जिसमें बहुत सारी फ्रिक्वेंसीज  हैं या दूसरे शब्दों में प्रकाश बहुत सारी फ्रिक्वेंसीज का एक स्पेक्ट्रम है या शृंखला है जिसमें नंगी आंखों से दिखने वाले प्रकाश के अलावा एक्सरे, रेडियो तरंगें, थर्मल Radiation पाए जाते हैं. दोस्तों आदि काल से हम इस दुनियाँ को लाइट या प्रकाश के माध्यम से देखते आ रहे हैं पर बहुत लंबा समय लगा इस प्रकाश को नियंत्रित करके एक निश्चित दिशा में ले जाने में वह भी तब जब फाइबर Optics केबल यानी लाइट पाइप का विकास हुआ coded सिग्नल को भेजने के लिए. जब प्रकाश किरण हवा से ग्लास के ऊपर पड़ता है तब इसका कुछ हिस्सा तो ग्लास पार करके निकल जाता है और बाकी हिस्सा परावर्तित यानी Reflect हो जाता है या कह सकते हैं ग्लास की सतह से टकराकर इधर-उधर चला जाता है. जब प्रकाश की किरणें या लाइट बीम ग्लास को पार करती है तो इसका रास्ता थोड़ा सा मुड़ जाता है या Bend हो जाता है. ऐसा इसलिए होता है कि ग्लास का apvartan सूचकांक या Refrective index हवा के Refrective index से अलग होता है. बताता चलूँ कि Refrective index होता क्या है. Refrective index किसी भी Medium या माध्यम का वह गुण होता है जो य़ह तय करता है कि प्रकाश कितनी गति से उस माध्यम को पार कर लेगा. जब प्रकाश किरण परावर्तित होकर ग्लास से हवा में वापस आता है तो ऐसा हो सकता है कि य़ह हवा में वापस न आए और ग्लास के अन्दर ही परावर्तित या Reflect होता रहे. इस घटना को सम्पूर्ण आन्तरिक परावर्तन या Total Internal Reflection की घटना कहते हैं. इसी घटना के आधार पर प्रकाश को लंबी दूरी तक एक निश्चित दिशा में भेजने का कार्य बिना Optical पावर के अधिक नुकसान के किया जाता है. उचित समायोजन या proper adjustment की मदद से प्रकाश किरण ग्लास के अंदर ही उसकी दीवारों से बार बार टकराकर आगे बढ़ती है उसे बाहर निकलने का रास्ता नहीं मिलता. इसी तरह संकेतों को Electromagnetic तरंगों में Encode किया जाता है या परिवर्तित किया जाता है फिर इन तरंगों को Optical फाइबर के एक सिरे में प्रवाहित किया जाता है. Optical फाइबर के अंदर ये Electromagnetic तरंगें ग्लास की दीवारों से बार बार टकराते हुए आगे बढ़ती हैं और अपने अन्दर तमाम सूचनाओं को लिए लिए कई किलोमीटर तक आगे बढ़ जाती हैं. दोस्तों फाइबर Optics कम्युनिकेशन सिस्टम के तीन हिस्से होते हैं. पहला हिस्सा होता है ट्रांसमीटर जो कि सूचना को Encode यानी परिवर्तित करता है Optical सिग्नल में या प्रकाश संकेतों में. दूसरा हिस्सा होता है Optical फाइबर जो पूरे सूचना संकेतों को उनके मंजिल तक यानी पूर्व निर्धारित स्थान तक ले जाता है. इसका तीसरा हिस्सा होता है Receiver जो Encode किए हुए संकेतों को वापस सूचना में परिवर्तित या कन्वर्ट कर देता है. दोस्तों प्रकाश तरंगों या Optical waves में इतनी क्षमता होती है कि वह कई Terabyte per second डाटा ट्रान्सफर कर सकती है वह भी एक सिंगल Optical फाइबर के माध्यम से जो कि रेडियो या Copper केबल के माध्यम से होने वाले संचार में कदापि सम्भव नहीं है. इसके अलावा Optical फाइबर केबल पर खराब मौसम, बिजली गिरने का भी कोई असर उनके ऊपर नहीं होता.देखा जाय तो परंपरागत तारों की तुलना में Optical फाइबर सुरक्षित ज्यादा होता है. दोस्तों जानने की कोशिश करते हैं कि कैसे ये Optical फाइबर केबल बनाए गए . य़ह हम सभी को पता था कि क्या प्रभाव पड़ता है जब प्रकाश पारदर्शी माध्यमों जैसे पानी या ग्लास से गुजरता है. लेकिन प्रकाश को एक निश्चित दिशा देने और आगे ले जाने की तकनीक का विकास 19win शताब्दी की शुरुआत में हुआ. 1840 में जिनीवा विश्वविद्यालय के जीन डेनियल Colladon नाम के वैज्ञानिक ने पहली बार य़ह करके दिखाया कि पानी की बेहद संकुचित धारा यानी जेट में प्रकाश का एक नियन्त्रित Propagation या सम्बंहन किया जा सकता है. बाद में France के जैकस Bebinet ने भी यही प्रभाव देखा और पानी की धारा से आगे जाकर इसी तकनीक को ग्लास की मुड़ी हुई पाइप में आजमाया. कह सकते हैं कि जिस तरह प्रकाश तरंगों को पानी की पतली धारा के अन्दर ले जाया जा सकता है उसी तरह प्रकाश तरंगों को ग्लास के पाइपों में या ग्लास के रॉड में भी ले जाया जा सकता है. 
दोस्तों इस तरह का प्रभाव पानी के fauwaaron में रंगीन प्रकाश किरणों को अठखेलियाँ करते हुए आप ने देखा होगा. महान वैज्ञानिक माइकल Farade की सलाह पर Tindaal ने Colladon के रंगीन प्रकाशीय fowaron की अवधारणा को आगे बढ़ाया और 1854 में लंदन के रॉयल सोसाइटी में इसका प्रदर्शन किया. अब इस प्रभाव को प्लास्टिक फाइबर क्रिसमस ट्री में देखा जा सकता है. दोस्तों अब पूर्ण आन्तरिक परावर्तन या Total Internal Reflection का प्रयोग करते हुए किसी ऐसे पदार्थ के माध्यम से प्रकाश पुंज को एक निश्चित दिशा दे सकते हैं जिसका apvartan सूचकांक या Refrective index बहुत अधिक हो. Bebinet को पानी की जगह एक बेहतर विकल्प मिला ग्लास की पाइपों या ग्लास रॉड के रूप में जो कि ज्यादा उपलब्ध है, साथ ही सुविधाजनक और टिकाऊ है. ग्लास के इन बेलनों या पाइपों का ईस्तेमाल शुरुआती दौर में दवा और रक्षा क्षेत्र में हुआ. 1920 के शुरुआत में Clerence Hansal और जॉन logi Beired ने चित्रों या इमेजेज को ग्लास फाइबर के माध्यम से भेजने या प्रेषित करने का रास्ता दिखाया. 1930 के दशक में डॉक्टरों ने मरीजों के आन्तरिक अंगों की जाँच करने के लिए ग्लास फाइबर बंडल का ईस्तेमाल करना शुरू किया . ऑपरेशन के दौरान दातों के अन्दर रोशनी करने में भी इस तकनीक का इस्तेमाल किया जाने लगा. दोस्तों शुरुआती दिनों में Optical फाइबर जल्दी खराब हो जाते थे और बहुत लंबी दूरी तक प्रकाश तरंगों को भेजने या Propagation के लिए उपयुक्त नहीं थे. 1954 आते आते दुनियाँ ने ग्लास फाइबर के विकास में नयी ऊँचाइयाँ हासिल की. Imperial कॉलेज लंदन के हेराल्ड Hopkins और नरिंदर सिंह Kapani ने 75 सेंटीमीटर लंबे 10,000 से ज्यादा Optical फाइबर के बंडल का ईस्तेमाल करके चित्रों यानी Images को भेजने में सफलता हासिल की. Kapani भारतीय अमेरिकी भौतिक विज्ञानी थे और इस क्षेत्र में अपनी विशेष उपलब्धियों के लिए जाने जाते थे. दो साल बाद मिशिगन विश्वविद्यालय के लॉरेंस Curtis ने ग्लास clad फाइबर बनाने में सफलता अर्जित की. Clad का मतलब हुआ कि फाइबर के ऊपर एक Coating या Layer जो फाइबर को और सुरक्षा देगा. लॉरेंस के इस विचार ने कि फाइबर ग्लास को किसी कम Apvartan सूचकांक या Low Refrective index वाले पदार्थ से Cladding करने से लंबी दूरी तक सूचनाओं को भेजा जा सकता है. उसी वर्ष Kapani ने "फाइबर Optics" शब्द का प्रयोग किया. दोस्तों 1960 में Theodor Maiman ने पहला Laser बनाया जो कि एक बेहतरीन प्रकाशीय श्रोत या Optical source साबित हुआ है जिसने Optical संचार के क्षेत्र में अनुसंधान को आगे बढ़ाने में महत्तवपूर्ण भूमिका अदा की. समान्य तापमान पर काम करने में सक्षम Laser तकनीक विकसित होने के बाद य़ह सम्भव हो पाया कि किसी भी सूचना को डिजिटल तरीके से Optical सिग्नल में Encode या परिवर्तित किया जा सकता है. दोस्तों इतना सबकुछ हासिल होने के बाद भी इन प्रकाश संकेतों या लाइट सिग्नल को लंबी दूरी तक भेजना अभी भी बहुत बड़ी चुनौती थी. उस समय के बेहतरीन गुणवत्ता वाले उपलब्ध Optical फाइबर कुछ ही मीटर के बाद करीब 99% अपना पावर खो देते थे यानी इनका पावर नष्ट हो जाता था. 1966 में Kaw और उनके सहयोगी शोध के दौरान य़ह समझने में सफल रहे कि Optical सिग्नल अपनी क्षमता glass की गुणवत्ता अच्छी न होने के कारण खो देते थे न की प्रकाश के vikharao या Scattering के कारण.  Kaw साहब ने तब सलाह दिया कि बहुत ही अच्छी क्वालिटी के fused सिलिका को हाई Temperature पर पिघला कर बहुत ही पतले पतले Optical फाइबर को तैयार किया जाय. इस तरह से ग्लास फाइबर के अन्दर लाइट सिग्नल या प्रकाश संकेतों का नष्ट होना बहुत हद तक कम किया जा सका जैसे 20 डेसीबल से भी कम. इसका अर्थ य़ह है कि एक किलोमीटर के बाद भी कम से कम 1% सिग्नल काम कर रहा होगा. 1971 में अमेरिका की एक glass बनाने वाली कंपनी Carnis glass वर्क्स ने इस मापदण्ड के अनुसार केबल बनाने में कामयाब हासिल की.  दोस्तों आजकल फाइबर Drawing तकनीक के इस्तेमाल से ग्लास फाइबर का उत्पादन हो रहा है. सर्वप्रथम एक ऐसे मोटे glass रॉड का निर्माण किया जाता है जिसके अन्दर पहले से ही ज़रूरत के मुताबिक़ Refrective index यानी apavartan सूचकांक बना होता है . इस प्रक्रिया में केमिकल Vapour Deposition तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है . इसके लिए पहले से बने glass रॉड को करीब 1600 डिग्री सेल्सियस तक गर्म किया जाता है और जब ये पिघलने लगता है तब इसे खींचकर बहुत ही बारीक पतले Optical फाइबर तैयार किए जाते हैं. खींचने की प्रक्रिया के कारण फाइबर की मोटाई यानी व्यास कम हो जाता जा है जिससे मनचाही लंबाई मिल जाती है. इसके बाद इस खींचे हुए फाइबर को मजबूत और टिकाऊ बनाने के लिये इसके ऊपर एक सुरक्षा कवच की Coating की जाती है मतलब उसके ऊपर एक Layer चढ़ाते हैं. दोस्तों हमारे भारत में भी कोलकाता स्थित सेंट्रल ग्लास एवं Ceramic रिसर्च इंस्टिट्यूट में हाई क्वालिटी सिलिका आधारित Optical फाइबर बनाने की सुविधा है.  अनुसंधान की तरक्की से  Optical  फाइबर की क्षमता के कम होने का प्रतिशत बहुत ही कम हो गया है .दोस्तों आज फाइबर Optics टेक्नोलॉजी का ईस्तेमाल जनसंचार, मेडिकल साइंस, Laser टेक्नोलॉजी, Sensing इत्यादि में बड़े पैमाने पर हो रहा है. देश में एक बेहतरीन संचार प्रणाली को स्थापित करने और Quantum साइंस को और बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार ने अपने 2020 के बजट में एक राष्ट्रीय मिशन की घोषणा की है जिसके लिए 8000 करोड़ रुपयों का प्रावधान किया गया है. इस राशि को अगले पाँच वर्षों में उपयोग करना है. आज फाइबर Optics का नेटवर्क बहुत तेजी से हमारे देश में फैल रहा है और घर घर पहुंच रहा है. फाइबर Optics और Quantum Optics संचार प्रणाली इस ज़माने की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि है.

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