सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

बांग्लादेश संकट

दोस्तों नमस्कार zedplus में आप का स्वागत है. आज बात करेंगे बांग्लादेश की जहाँ अभी जनता ने वहाँ की सरकार के खिलाफ विद्रोह कर दिया, सैकड़ों लोग मारे गए और तो और प्रधानमंत्री शेख हसीना को देश छोड़कर भागना पड़ा. आज बात करेंगे बांग्लादेश के पूरे इतिहास की. बंग्लादेश कब बना. कभी पूर्वी बंगाल से पूर्वी पाकिस्तान और फिर बांग्लादेश. दोस्तों आगे बढ़ने से पहले आप से एक छोटी सी गुजारिश यदि आपने अभी तक मेरे चैनल को subscribe नहीं किया है तो प्लीज़ इसको subscribe कर लीजिए और बेल icon को प्रेस कर दीजिए. आते हैं पॉइन्ट पर. दोस्तों अगस्त 1947 में भारत में ब्रिटिश शासन के अंत के साथ ही साम्प्रदायिकता के आधार पर भारत के दो टुकड़े हो गए और एक नए देश पाकिस्तान का जन्म हुआ. हिन्दू बहुल पश्चिम बंगाल भारत के हिस्से में आया और मुस्लिम बहुल पूर्वी बंगाल पाकिस्तान के हिस्से में गया. पूर्वी बंगाल को नया नाम दिया गया East wing of पाकिस्तान  सीमाओं का निर्धारण सर Redcliff ने किया था .दोस्तों  शुरुआती दिनों में पाकिस्तान ने शासन प्रणाली के रूप में संसदीय लोकतंत्र को अपनाने की बात की पर जिस संविधान सभा के ऊप...
हाल की पोस्ट

मंडल आयोग एवं पिछड़ा वर्ग आरक्षण

 आज सुप्रीम कोर्ट ने Creamy Layer की चर्चा करके एक बार फिर से मंडल आयोग को चर्चा के केंद्र लाकर खड़ा कर दिया तो आज बात करेंगे मंडल आयोग क्या था, इसकी सिफारिशें क्या थीं.  क्या है Creamy Layer की अवधारणा. क्या आरक्षण का लाभ सिर्फ कुछ लोंगों तक ही सिमट कर रह गया है जाना इस के मूल उद्देश्य की विफलता  है और इसमें सुधार कैसे सम्भव है. और अन्त में कौन थे BP मंडल. दोस्तों संविधान का article 15 देश के नागरिकों के प्रति धर्म नस्ल जाति सेक्स और जन्मस्थान के आधार पर किसी भी प्रकार के भेदभाव को प्रतिबन्धित करता है. इसी तरह संविधान का article 16 सरकारी सेवाओं के लिए भर्ती यानी Recruitment में धर्म नस्ल जाति सेक्स और जन्मस्थान के आधार पर किसी भी प्रकार के भेदभाव को प्रतिबन्धित करता है. यदि किसी समुदाय का प्रतिनिधित्व  इन सेवाओं में पर्याप्त नहीं है तो उसके पक्ष में आरक्षण का प्रावधान किया जा सकता है. दोस्तों तात्पर्य य़ह है कि भारतीय समाज के सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े हुए लोंगों जैसे पिछड़े वर्गों, अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जन-जातियों को सामाजिक न्याय उपलब्ध कर...

अल्पसंख्यकों के संवैधानिक अधिकार

भारत के संविधान में प्रदत्त अल्पसंख्यकों के विशेष अधिकारों की. किस तरह से धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यकों के शैक्षणिक और सांस्कृतिक अधिकारों को विशेष संवैधानिक प्रावधानों के माध्यम से सुरक्षा प्रदान की गयी है. दोस्तों आगे बढ़ने से पहले आप से एक छोटी सी गुजारिश यदि आपने अभी तक मेरे चैनल को subscribe नहीं किया है तो प्लीज़ इसको subscribe कर लीजिए और बेल icon को प्रेस कर दीजिए. आते हैं पॉइन्ट पर. दोस्तों सामाजिक और राजनैतिक क्षेत्रों में समानता और न्याय के दो आदर्श भारतीय संविधान के आधार स्तम्भ हैं. भारत का संविधान धर्म जाति जन्मस्थान के आधार पर किसी भी प्रकार के भेदभाव को प्रतिबन्धित करता है. यही कारण था कि भारत के संविधान में साम्प्रदायिकता के आधार पर किसी भी प्रकार के प्रतिनिधित्व को स्थान नहीं दिया गया फिर चाहे वह विधायिका हो या कार्यपालिका. दोस्तों समता और न्याय के संवैधानिक शब्द कहीं खोखले नारे साबित न हों इसलिए ऐसे प्रावधान बनाए गए जो वास्तव में समाज के सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े हुए लोंगों के उत्थान की दिशा में ठोस कदम साबित हों. जब तक सामाजिक Samatalikaran की दिशा ...

Destruction of Nalanda University

दोस्तों नमस्कार zedplus में आप का स्वागत है. आज बात करेंगे प्राचीन भारत के गौरव नालंदा विश्वविद्यालय की. कब हुई इसकी स्थापना, इसे किसने स्थापित किया , शिक्षा के क्षेत्र में इस बौद्ध विश्वविद्यालय के गौरवशाली योगदान की और अन्त में सबसे महत्त्वपूर्ण प्रश्न किसने नालंदा विश्वविद्यालय को नष्ट किया आक्रान्ता बख्तियार खिलजी ने या फिर कट्टरपंथी  ब्राह्मणों ने. दोस्तों आगे बढ़ने से पहले आप से एक छोटी सी गुजारिश यदि आपने अभी तक मेरे चैनल को subscribe नहीं किया है तो प्लीज़ इसको subscribe कर लीजिए और बेल icon को प्रेस कर दीजिए. आते हैं पॉइन्ट पर. दोस्तों प्राचीन भारत के गौरव नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना पांचवीं शताब्दी में पूर्व मगध के शासक कुमार गुप्त के शासनकाल के दौरान हुई. ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी से 500 साल पहले स्थापित नालंदा विश्वविद्यालय सम्भवतः पूरे विश्व का प्रथम इतना बृहत शिक्षा केंद्र था जहाँ दस हजार विद्यार्थी एक साथ रहकर बुद्धिवाद, तर्कशास्त्र, गणित, मेडिसन, और कई अन्य विषयों  का अध्ययन करते थे. कहा जाता है कि नालंदा विश्वविद्यालय के विशालकाय नौ मंजिला पुस्तकालय में 90 ला...

नालंदा महा विहार

दोस्तों नमस्कार zedplus में आप का स्वागत है. आज बात करेंगे प्राचीन भारत के गौरव नालंदा विश्वविद्यालय की. कब हुई इसकी स्थापना, किसने स्थापित किया , शिक्षा के क्षेत्र में इस बौद्ध विश्वविद्यालय के गौरवशाली योगदान की और अन्त में सबसे महत्त्वपूर्ण प्रश्न किसने नालंदा विश्वविद्यालय को नष्ट किया आक्रान्ता बख्तियार खिलजी ने या फिर कट्टरपंथी  ब्राह्मणों ने. दोस्तों आगे बढ़ने से पहले आप से एक छोटी सी गुजारिश यदि आपने अभी तक मेरे चैनल को subscribe नहीं किया है तो प्लीज़ इसको subscribe कर लीजिए और बेल icon को प्रेस कर दीजिए. आते हैं पॉइन्ट पर. दोस्तों प्राचीन भारत के गौरव नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना 427 से 450 ईशा पूर्व मगध के शासक कुमार गुप्त के शासनकाल के दौरान हुई. ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी से 500 साल पहले स्थापित नालंदा विश्वविद्यालय सम्भवतः पूरे विश्व का प्रथम इतना बृहत शिक्षा केंद्र था जहाँ दस हजार विद्यार्थी एक साथ रहकर बुद्धिवाद, तर्कशास्त्र, गणित, मेडिसन, और कई अन्य विषयों  का अध्ययन करते थे. कहा जाता है कि नालंदा विश्वविद्यालय के विशालकाय नौ मंजिला पुस्तकालय में 90 लाख से अधिक...

गोलक नाथ केस, 24th संविधान संशोधन, Keshwanand Bharati case, Minerva Milles केस

 आज बात करेंगे अनुच्छेद 368 पर गोलक नाथ मामले की, 24वें संविधान संशोधन की, Keshwanand भारती मामले की और अंत में Minrva Milles मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले की. दोस्तों आगे बढ़ने से पहले आप से एक छोटी सी गुजारिश यदि आपने अभी तक मेरे चैनल को subscribe नहीं किया है तो प्लीज़ इसको subscribe कर लीजिए और बेल icon को भी प्रेस कर दीजिए. आते हैं पॉइन्ट पर. दोस्तों संविधान विशेषज्ञों के बीच एक विवाद खड़ा हो गया कि क्या अनुच्छेद 368 के अन्तर्गत बनाए गए कानून संविधान के दूसरे अनुच्छेद 13(2) के अनुरूप होने चाहिए. इसका अर्थ य़ह है कि क्या वह संविधान संशोधन असंवैधानिक होगा जो मौलिक अधिकारों को परिवर्तित करता है या उन्हें समाप्त करता है. दोस्तों गोलक नाथ फैसला आने से पहले यानी 1967 से पहले सुप्रीम कोर्ट की राय थी कि संविधान का कोई भी हिस्सा असंशोधनिय यानी Unamendable नहीं है. संसद अनुच्छेद 368 के अन्तर्गत सक्षम है कोई भी संविधान संशोधन विधेयक पारित करने के लिए जिसमें मौलिक अधिकार भी शामिल हैं. यहाँ तक कि संसद स्वयं अनुच्छेद 368 को भी संशोधित करने का अधिकार रखती है. सुप्रीम कोर्ट की य...

अनुच्छेद 368 .संविधान संशोधन

आज का टॉपिक है संविधान के अनुच्छेद 368 की जो संसद को संविधान संशोधन का अधिकार देता है. दोस्तों आगे बढ़ने से पहले आप से एक छोटी सी गुजारिश यदि आपने अभी तक मेरे चैनल को subscribe नहीं किया है तो प्लीज़ इसको subscribe कर लीजिए और बेल icon को प्रेस कर दीजिए. आते हैं पॉइन्ट पर. दोस्तों संविधान संशोधन पर चर्चा के दौरान संविधान सभा में प्रधानमंत्री नेहरू ने कहा था कि संविधान इतना कठोर नहीं होना चाहिए कि राष्ट्रीय विकास और परिवर्तनशील आवश्यकताओं का समायोजन न कर सके. डॉ अम्बेडकर ने कहा कि जो लोग संविधान से सन्तुष्ट नहीं हैं उन्हें सिर्फ दो तिहाई बहुमत हासिल करना है और यदि वे देश की संसद में दो तिहाई बहुमत नहीं प्राप्त कर सकते तो इसका मतलब साफ़ है कि देश की जनता उनके इरादों में उनके साथ नहीं है. दोस्तों आम तौर पर संघीय व्यवस्था में संविधान संशोधन की जिम्मेदारी किसी विशेष संस्था को दी जाती है न कि संसद को या संविधान संशोधन के लिए एक कठिन प्रक्रिया का पालन करना होता है  ताकि संघीय संसद की इच्छानुसार संघ और राज्यों के बीच सम्बन्ध प्रभावित न हों. दोस्तों भारत के संविधान निर्माता संसद...

चाबहार समझौता

  भारत और ईरान के बीच 13 मई 2024 ek हुआ समझौता जिसके अंतर्गत अगले 10 वर्षों तक भारत चाबहार बंदरगाह को विकसित करने के साथ साथ इसका संचालन भी करेगा. ईरान के sistan-बलूचिस्तान प्रान्त में स्थित देश के विभाजन के पहले भारत के ठीक दरवाजे पर था. य़ह वह स्थान है जहां पर हिंदुस्तानी ऊर्दू  बड़े अच्छे से बोली और समझी जाती है. यही वह जगह है जहाँ कभी पंचतंत्र को उसके फ़ारसी अनुवाद में बड़े चाव से पढ़ा जाता था. दोस्तों भारत की स्वतंत्रता के बाद और ईरान के 1979 की इस्लामिक क्रान्ति के पहले दोनों देशों के सम्बन्ध बहुत मधुर नहीं रहे. कारण था ईरान के शाह का अमेरिका की तरफ विशेष झुकाव और भारत की गुट निरपेक्ष नीति. वैसे 1970 के दशक में ही ईरान के शाह ने चाबहार बन्दरगाह को विकसित की आवश्यकता पर विचार व्यक्त किया इसका मुख्य कारण था यहां का अनुकूल मौसम और गर्म जल का बन्दरगाह होने के साथ साथ य़ह हिंद महासागर में ईरान का इकलौता प्रवेश द्वार है. विशेष बात यह है कि भू - रणनीति दृष्टिकोण यानी Geo-Stratgic Point of view से महत्तवपूर्ण ओमान की खाड़ी और Harmuj जलसन्धि के बीचो बीच स्थित है. दोस्...

Educational and Cultural Rights

 का टॉपिक है अनुच्छेद 29 और 30 यानी Educational and cultural rights. दोस्तों आगे बढ़ने से पहले आप से एक छोटी सी गुजारिश यदि आपने अभी तक मेरे चैनल को subscribe नहीं किया है तो प्लीज़ इसको subscribe कर लीजिए और बेल icon को भी प्रेस कर दीजिए, आते हैं पॉइन्ट पर. दोस्तों भारत के संविधान में अल्पसंख्यकों के धार्मिक और साँस्कृतिक हितों की रक्षा के लिए विशेष व्यवस्था की गयी है. संविधान का अनुच्छेद 29 कहता है कि राज्य किसी भी अल्पसंख्यक समुदाय पर कोई संस्कृति नहीं थोपेगा सिवाय इसके स्वयम के. The state shall not impose upon it any culture other than it's own Article 29(1). दोस्तों ,संविधान के अनुच्छेद 30 के अनुसार अल्पसंख्यक समुदाय को अपनी इच्छानुसार शिक्षण संस्थाओं को खोलने और उन्हें संचालित करने की स्वतंत्रता होगी. राज्य द्वारा शिक्षण संस्थाओं को सहायता प्रदान करने की क्रिया में अल्पसंख्यक समुदाय द्वारा संचालित शिक्षण संस्थाओं के प्रति कोई भेदभाव नहीं होगा. अनुच्छेद 30(1A) के अनुसार यदि अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान की सम्पत्ति का राज्य द्वारा अधिग्रहण किया जाता है तो पूर्ण मुआवजा ...

Right to religion under articles 25,26,27 and 28.

 के संविधान के अनुसार भारत एक धर्म निरपेक्ष  है यानी सेकुलर राष्ट्र है जिसका अर्थ य़ह हुआ कि राज्य सभी धर्मों के प्रति तटस्थ और निष्पक्ष रहेगा. एक धर्म निरपेक्ष राष्ट्र की मान्यता होती है कि राज्य की भूमिका मानवीय और सांसारिक मामलों तक ही सीमित होगी और इसका इश्वरीय संबंधों से कोई लेना देना नहीं है. व्यक्ति का इश्वर से सम्बन्ध उसके व्यक्तिगत विश्वास का विषय है. राज्य की दृष्टि में सभी धर्मों का स्थान समान है और राज्य लोंगों के धार्मिक अधिकारों, उनकी  आस्था और अराधना में किसी प्रकार का कोई हस्तक्षेप नहीं करेगा. संविधान के अनुच्छेद 25 से 28  सभी धर्मों के प्रति राज्य की निष्पक्षता को सुनिश्चित  करते हैं. दोस्तों संविधान का अनुच्छेद 25 सभी व्यक्तियों को अन्तःकरण की स्वतंत्रता के साथ-साथ अपने धर्म मानने, पालन करने और उसके प्रचार की स्वतंत्रता प्रदान करता है यानी Freedom of conscience and right to profes, practice and propagate his religion. अन्तः करण की स्वतंत्रता का अर्थ हुआ कि ईश्वर से अपने संबंधों को अपनी इच्छानुसार निर्धारित करना. Right to profes का अ...