यह एक दुर्भाग्य की बात है कि आज देश में कॉलेजों और विश्वविद्यालयों से कहीं अधिक कोचिंग सेण्टर हैं. भारत के कुछ शहर तो पहचानें ही जाते हैं कोचिंग सेंटर की वजह से,उदाहरण के तौर पर राजस्थान का कोटा शहर. यहाँ के कोचिंग centers के बारे में आम धारणा है कि उनमें पढ़ाई करके
JEE/NEET जैसे कठिन परिक्षाओं को पास कर पाना आसान हो जाएगा. दोस्तों, कभी यहाँ की कोचिंग centers के शानदार प्रदर्शन के लिए जाना जाने वाला कोटा शहर आज कल कुछ दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं को लेकर ज्यादा चर्चा में है. छात्रों की बढ़ती आत्महत्या की घटनाओं ने अभिभावकों के साथ साथ पूरे देश को झकझोर दिया है. देस में एक नयी बहस खड़ी हो गई है और य़ह है महत्वाकांक्षाओं और उपलब्ध अवसरों के बीच की बढ़ती खाई. दोस्तों आज उन प्रश्नों पर प्रकाश डालने की कोशिश करूंगा कि क्यों देश के तमाम हिस्सों से छात्र यहाँ आने का फैसला लेते हैं.प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते समय उन्हें किन समस्याओं का सामना करना पड़ता है. जानी-मानी सर्वे संस्था लोकनीति -CSDS ने october के पहले और दूसरे सप्ताह में 1000 से ज्यादा छात्रों से बात की, उनकी समस्याओं और तमाम दूसरे प्रश्नों के जवाब प्राप्त करने की कोशिश की. इन 1000 छात्रों में 30%लड़कियाँ शामिल हैं. छात्रों से आमने-सामने प्रश्नों को प्रश्नसूची के माध्यम से सर्वे किया गया. 15-20 मिनट लगे प्रत्येक छात्र से बात करने में. कोटा आने वाले छात्रों में 32% छात्र अकेले विहार से आते हैं. उत्तर प्रदेश से 23% और मध्यप्रदेश से 11% छात्र यहाँ आते हैं. इनमें से करीब आधे छात्र विभिन्न शहरों या छोटे टाउन से आते हैं जबकि गाँवों से आने वाले छात्रों की संख्या सिर्फ 14% है. ज्यादातर बच्चे मध्यम वर्गीय परिवारों से आते हैं इनमें से 27% परिवारों की आमदनी का जरिया सरकारी नौकरी है, 21% परिवार बिजनेस में हैं जबकि 14% परिवारों की आमदनी का आधार कृषि है. लोकनीति -Csds के सर्वे के अनुसार कोटा में पढ़ने वाले छात्रों में 13%ऐसे छात्र हैं जिनके परिवार का कोई न कोई कोटा में पढ़ चुका है जबकी 28% छात्रों के दूर के रिश्तेदार कोटा में पढ़ाई कर चुके हैं और इन छात्रों को कोटा आने की प्रेरणा इन्हीं रिश्तेदारों से मिली. 53% छात्र ऐसे हैं जिनका कोई रिश्तेदार कोटा में नहीं पढ़ा था. 44% छात्रों को कोटा की कोचिंग centers की जानकारी सोशल मीडिया से मिली. करीब करीब आधे छात्र यानी 46% कोटा के कोचिंग centers के Reputation सुनकर यहां पढ़ाई के लिए आए वहीँ 39% छात्र अभिभावकों के जोर देने पर कोटा आए. 10% छात्र ऐसे हैं जो अपने साथियों से प्रभावित होकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने कोटा आए. कोटा में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वालों में 63%लड़के हैं और 37%लड़कियाँ हैं. प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे JEE/NEET की प्रवेश परीक्षा के लिए आने वाले छात्रों 12th Class के बाद ही आते हैं और सभी की उम्र 15 - 19 वर्ष है .
मेडिकल कॉलेज में एडमिशन के लिए होने वाली NEET परीक्षा सबसे ज्यादा पॉपुलर है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि य़ह करीब 59% छात्रों की पसन्द है. इनमें 76%लड़कियाँ और 24%लड़के हैं. वहीँ इंजीनियरिंग की प्रवेश परीक्षा JEE ,35% छात्रों की पसन्द है. अपने पहले प्रयास में jee/NEET परीक्षा Clear न कर पाने वाले छात्रों में ज्यादातर कोटा छोड़कर चले जाते हैं. 46% छात्र ऐसे होते हैं जो jee/NEET में पहली बार बैठ रहे होते हैं जबकि 26% पहले प्रयास की असफलता के बाद भी कोटा में बने रहते हैं ऐसे छात्रों की संख्या करीब 13% है जो पहले ही दो प्रयास कर चुके हैं. ऐसे छात्रों की संख्या भी काफी है जो कोटा आने से पहले दूसरे कोचिंग centers में पढ़ाई कर चुके हैं और वे वहाँ की पढ़ाई से संतुष्ट नहीं थे. कोटा में अपना पहला प्रयास करने वाले छात्रों में 23% ऐसे हैं जो कोटा आने से पहले किसी अन्य कोचिंग सेंटर में पढ़ाई कर चुके हैं. य़ह संख्या 39% हो जाती है जब हम उन्हें भी शामिल करते हैं जो पहले ही दो प्रयास कर चुके हैं. कोचिंग सेंटरों में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के अलावा छात्रों को किसी स्कूल में एडमिशन लेना होता है, बोर्ड की परीक्षा भी पास करनी होती है क्योंकि बोर्ड परीक्षा पास किए बिना JEE/NEET में प्रवेश नहीं मिलेगा. 16% ही ऐसे छात्र हैं जो रेगुलर स्कूल जाते हैं जबकि 81% छात्र ऐसे हैं जो कोचिंग सेंटरों में पढ़ने के लिए किसी डमी स्कूल में एडमिशन ले लेते हैं ताकि उन्हें रेगुलर स्कूल न जाना पड़े. ये स्कूल फीस लेकर य़ह सुनिश्चत करते हैं कि रेगुलर स्कूल न आने के बावजूद बोर्ड परीक्षा में बैठने की सारी औपचारिकताएं पूरी हो सकें. कोटा में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों में 49% छात्र होस्टलों में रहते हैं जबकि 30% छात्र PG में रहना पसन्द करते हैं. 17% ऐसे भी छात्र हैं जो अपार्टमेंट में किराये पर रहना पसन्द करते हैं. ठहरने के इन स्थानों में सुविधाओं के स्तर में भिन्नता है. कोटा के होस्टलों और PG में रहने वालों छात्रों से जब बात की गयी तो सिर्फ 12% छात्रों ने कहा कि खाना अच्छा मिलता है. 27% छात्रों को वहाँ का खाना पसन्द नहीं वही 57% छात्रों की राय में खाना बस कामचलाऊ था. इन तमाम चुनौतियों के बावजूद साल दर साल भारी संख्या में छात्र कोटा आते हैं, कोई कोचिंग सेंटर जॉइन करते हैं, किसीडमी स्कूल में एडमिशन लेते हैं, हॉस्टल, PG या अपार्टमेंट में ठहरने का इंतजाम करते हैं.
सवाल ऐसा ये सब छात्र क्यों करते हैं? करीब 65% छात्र मानते हैं कि JEE/NEET परीक्षा निकालना उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि ये परीक्षाएं जिंदगी बेहतर बनाने का शानदार अवसर प्रदान करती हैं. 35% छात्र सोचते हैं कि JEE/NEET परीक्षा Clear करने के बाद जिंदगी में सेटल होने में मदद मिलेगी. 22% छात्रों की सोच है कि समाज में उनकी इज्जत बढ़ेगी वहीँ 16% छात्रों का मानना है कि उनकी आर्थिक स्थिति में सकारात्मक बदलाव आयेगा. दोस्तों लोक नीति-CSDS ने इस सर्वे के माध्यम से कोटा में रह रहे छात्रों की समस्याओं को जानने-समझने की कोशिश की ताकि पेरेंट्स सही निर्णय ले सकें.
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