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मई, 2024 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

Educational and Cultural Rights

 का टॉपिक है अनुच्छेद 29 और 30 यानी Educational and cultural rights. दोस्तों आगे बढ़ने से पहले आप से एक छोटी सी गुजारिश यदि आपने अभी तक मेरे चैनल को subscribe नहीं किया है तो प्लीज़ इसको subscribe कर लीजिए और बेल icon को भी प्रेस कर दीजिए, आते हैं पॉइन्ट पर. दोस्तों भारत के संविधान में अल्पसंख्यकों के धार्मिक और साँस्कृतिक हितों की रक्षा के लिए विशेष व्यवस्था की गयी है. संविधान का अनुच्छेद 29 कहता है कि राज्य किसी भी अल्पसंख्यक समुदाय पर कोई संस्कृति नहीं थोपेगा सिवाय इसके स्वयम के. The state shall not impose upon it any culture other than it's own Article 29(1). दोस्तों ,संविधान के अनुच्छेद 30 के अनुसार अल्पसंख्यक समुदाय को अपनी इच्छानुसार शिक्षण संस्थाओं को खोलने और उन्हें संचालित करने की स्वतंत्रता होगी. राज्य द्वारा शिक्षण संस्थाओं को सहायता प्रदान करने की क्रिया में अल्पसंख्यक समुदाय द्वारा संचालित शिक्षण संस्थाओं के प्रति कोई भेदभाव नहीं होगा. अनुच्छेद 30(1A) के अनुसार यदि अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान की सम्पत्ति का राज्य द्वारा अधिग्रहण किया जाता है तो पूर्ण मुआवजा ...

Right to religion under articles 25,26,27 and 28.

 के संविधान के अनुसार भारत एक धर्म निरपेक्ष  है यानी सेकुलर राष्ट्र है जिसका अर्थ य़ह हुआ कि राज्य सभी धर्मों के प्रति तटस्थ और निष्पक्ष रहेगा. एक धर्म निरपेक्ष राष्ट्र की मान्यता होती है कि राज्य की भूमिका मानवीय और सांसारिक मामलों तक ही सीमित होगी और इसका इश्वरीय संबंधों से कोई लेना देना नहीं है. व्यक्ति का इश्वर से सम्बन्ध उसके व्यक्तिगत विश्वास का विषय है. राज्य की दृष्टि में सभी धर्मों का स्थान समान है और राज्य लोंगों के धार्मिक अधिकारों, उनकी  आस्था और अराधना में किसी प्रकार का कोई हस्तक्षेप नहीं करेगा. संविधान के अनुच्छेद 25 से 28  सभी धर्मों के प्रति राज्य की निष्पक्षता को सुनिश्चित  करते हैं. दोस्तों संविधान का अनुच्छेद 25 सभी व्यक्तियों को अन्तःकरण की स्वतंत्रता के साथ-साथ अपने धर्म मानने, पालन करने और उसके प्रचार की स्वतंत्रता प्रदान करता है यानी Freedom of conscience and right to profes, practice and propagate his religion. अन्तः करण की स्वतंत्रता का अर्थ हुआ कि ईश्वर से अपने संबंधों को अपनी इच्छानुसार निर्धारित करना. Right to profes का अ...

Justice KN Wanchoo, A judge without a law degree.

 बात करेंगे एक ऐसे शख्स की जो बिना किसी लॉ की डिग्री के या कानून की बिना किसी औपचारिक पढ़ाई के ही हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के Judge ही नहीं बल्कि भारत के मुख्य न्यायाधीश यानी Chief Justice of India की अत्यंत प्रतिष्ठापूर्ण स्थान को प्राप्त किया. इसकी भी बात करेंगे कि ऐसा कैसे सम्भव हो पाया. दोस्तों आगे बढ़ने से पहले आप से एक छोटी सी गुजारिश यदि आपने अभी तक मेरे चैनल को subscribe नहीं किया है तो प्लीज़ इसको subscribe कर लीजिए और बेल icon को भी press कर दीजिए. दोस्तों हम बात कर रहे हैं भारत के दसवें मुख्य न्यायाधीश श्रीमान कैलाश नाथ Wanchoo की. अपनी विलक्षण प्रतिभा के दम पर सफलता की एक एक सीढ़ियां चढ़ते हुए वे देश के मुख्य न्यायाधीश की कुर्सी पर बिराजमान हुए और देश के सामने एक अनोखा उदाहरण प्रस्तुत किया. सर कैलाश नाथ Wanchoo 24 अप्रैल 1967 को भारत के मुख्य न्यायाधीश बनाए गए और उन्होंने इस पद को 24 फरवरी 1968 तक सुशोभित किया. दोस्तों जस्टिस Wanchoo एक करिअर नौकरशाह थे यानी अंग्रेजों के ज़माने के ICS ऑफिसर. दोस्तों 1924 में ICS की परीक्षा पास करने वाले कैलाश नाथ Wanchoo क...