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अप्रैल, 2024 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

Cadre आवंटन

 16 मार्च 2024 को सिविल सर्विसेस का रिजल्ट आया जिसमें देश की विभिन्न सेवाओं के लिए 1000 से ज्यादा अभ्यर्थियों का चयन किया गया है उसमें IAS,IPS,IFS के अलावा ग्रुप A और  ग्रुप B के तमाम पद शामिल हैं. दोस्तों परीक्षा का परिणाम आते ही सभी चयनित अभ्यर्थी सीधे सरकारी अधिकारी नहीं बन जाते. य़ह निर्भर करता है उनकी प्राथमिकता,मेरिट लिस्ट में उनका स्थान और उनके द्वारा चयनित राज्य में उपलब्ध पदों की संख्या पर. आइए देखते हैं संघ लोकसेवा आयोग की द्वारा आयोजित civil सेवा परीक्षा में Cadre क्या होता है. Cadre असल में उस विशेष राज्य या केंद्र शासित प्रदेश को कहते हैं जिसके लिए All India Services जैसे IAS,IPS, और IFS के लिए चयनित हुए अभ्यर्थियों का आवंटन होता है यानी Cadre आवंटित होने के बाद ये अधिकारी उन्हीं विशेष राज्यों में काम करेंगे . दोस्तों Cadre आवंटन की प्रक्रिया कई चरणों में की जाती है. भारत के राज्यों को 24 Cadres में विभाजित किया गया है जबकि अपवादस्वरूप तीन संयुक्त Cadres भी हैं जैसे असम-मेघालय का संयुक्त Cadre है उसी तरह मणिपुर-त्रिपुरा का संयुक्त Cadres है और इसके अलावा अरुणाचल प...

अनुच्छेद 23 और 24

 संविधान का अनुच्छेद 23 सभी लोंगों को शोषण के विरुद्ध अधिकार देता है यानी Right against Exploitation. अनुच्छेद 24 फैक्टरी या अन्य घातक उद्योगों में बच्चों के नियोजन को प्रतिबंधित करता है. पहले बात करते हैं अनुच्छेद 23 का. दोस्तों संविधान का अनुच्छेद 23 राज्य द्वारा या अन्य व्यक्तियों द्वारा समाज के कमजोर वर्गों के लोगों के शोषण के विरुद्ध अधिकार देता है. अनुच्छेद 23 का क्लॉज वन कहता है कि मानव तस्करी, बेगार और इसी प्रकार के दूसरे जबरन मजदूरी जैसे मामलों को प्रतिबन्धित किया जाता है और इस प्रावधान का किसी भी प्रकार का उल्लंघन विधि के अनुसार दण्डनीय होगा. क्लॉज टू कहता है कि अनुच्छेद 23 राज्य को सार्वजनिक प्रयोजन के लिए अनिवार्य सेवाओं को लागू करने से रोक नहीं सकता और इन सेवाओं को लागू करने में धर्म  ,वर्ण, जाति, या वर्ग के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होगा. दोस्तों आज भले ही दासता अपने प्राचीन रूप में समाज में दिखाई न देता हो लेकिन य़ह अपने नए रूपों में विद्यमान है जिसे संविधान ने एक समान्य नाम दिया है शोषण यानी Exploitation जो मानव स्वतंत्रता और सभ्यता के लिए एक गंभीर चु...

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 22 और Preventive Detention

संविधान का अनुच्छेद 22 क्या है और Preventive Detentions क्याहै. अनुच्छेद 22 को आवश्यक बुराई यानी Necessary Evil क्यों कहते हैं. .संविधान का अनुच्छेद 22 सभी व्यक्तियों को मनमाने-पूर्ण तरीकों से गिरफ्तारी और हिरासत में लिए जाने से सुरक्षा देता है. अनुच्छेद 22 का  क्लॉज वन कहता है कि किसी भी गिरफ्तार व्यक्ति को उसकी गिरफ्तारी के कारणों की सूचना जितनी जल्दी सम्भव हो दिए बिना उसे हिरासत में नहीं रखा जा सकता. क्लॉज टू कहता है कि गिरफ्तार व्यक्ति को अपनी पसन्द के अधिवक्ता से सलाह लेने और अपना बचाव करने के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता. क्लॉज थ्री के अनुसार गिरफ्तार किए गए और हिरासत में लिए गए व्यक्ति को 24 घण्टे के अन्दर नजदीकी Magistrate के यहाँ प्रस्तुत करना होगा. इसमें गिरफ्तारी के स्थान से कोर्ट तक आने का समय शामिल नहीं है. ऐसे व्यक्ति को बिना Magistrate के आदेश के 24 घण्टे से अधिक समय तक हिरासत में नहीं रखा जा सकता. दोस्तों ये सुरक्षा उपाय विदेशी शत्रुओं और Preventive Detention के अन्तर्गत गिरफ्तार व्यक्तियों को उपलब्ध नहीं होंगे. संविधान के अनुच्छेद 22(2) के अंतर्गत ...

PMLA or Prevention of Money Laundering Act 2002

 PMLA क्या है. य़ह कब और क्यों अस्तित्व में आया. इसका मूल उद्देश्य क्या था और सबसे बड़ा प्रश्न क्या PMLA वास्तव में पैर नहीं सर के बल खड़ा है. दोस्तों आगे बढ़ने से पहले आप से एक छोटी सी गुजारिश यदि आपने अभी तक मेरे चैनल को subscribe नहीं किया है तो प्लीज़ इसको subscribe कर लीजिए और बेल icon को प्रेस कर दीजिए. आते हैं पॉइन्ट पर. दोस्तों जब 2002 में PMLA यानी Prevention of Money Laundering Act  बनाया गया तो इसका उद्देश्य था उस काले धन को पकड़ना जो अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर Drug Trafficking यानी जो नशे के कारोबार से उत्पन्न हो रहा है और इस मात्रा में कि विश्व अर्थव्यवस्था को सीधे चोट पहुंचा रहा है. अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर य़ह भावना व्यापक रूप ले रही थी कि जिस स्तर पर ड्रग्स यानी नशीले पदार्थों का कारोबार काला धन पैदा कर रहा है और वैध अर्थव्यवस्था का हिस्सा बनता जा रहा है कि उससे कई देशों की एकता और संप्रभुता को खतरा पहुंच रहा है.  दोस्तों आइए जानते हैं कि इसकी पृष्ठभूमि क्या है. संयुक्तराष्ट्र संघ ने नशीले ड्रग्स के अंतरराष्ट्रीय कारोबार को गंभीरता से लेते हुए 1988 म...

अनुच्छेद 21,भारतीय संविधान

संविधान का अनुच्छेद 21 सभी व्यक्तियों को जीवन जीने और निजी स्वतंत्रता के अधिकार को सुरक्षा प्रदान करता है .अनुच्छेद 21 के अनुसार No person shall be deprived of his life or personal liberty except according to the procedure established by law. यानी किसी भी व्यक्ति को उसके जीवन और वैयक्तिक स्वतंत्रता से वंचित नहीं किया जा सकता सिवाय विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया के. दोस्तों सीधे तौर पर इसका अर्थ य़ह हुआ कि बिना किसी कानूनी आधार के कोई भी सरकारी संस्था या अधिकारी किसी भी व्यक्ति के वैयक्तिक स्वतंत्रता में हस्तक्षेप नहीं कर सकते. आशय यह है कि किसी भी व्यक्ति के साथ दैहिक ज़ोर जबरदस्ती यानी Physical coercion  नहीं किया जा सकता जब तक कि इस कदम का कोई न्यायिक औचित्य न हो. जब कभी भी राज्य या राज्य के अधिकारी या एजेंट किसी व्यक्ति को उसके निजी स्वतंत्रता से वंचित करते हैं तो उनका य़ह कदम तभी सही ठहराया जा सकता है जब इस कदम का कोई वैधिक आधार हो और विधि द्वारा निर्धारित  प्रक्रिया का सख्ती और ईमानदारी से पालन किया गया हो. यहाँ पर य़ह स्पष्ट करना आवश्यक है कि अनुच्छेद 21 में व...