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जनवरी, 2024 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

गुरुद्वारा सुधार आन्दोलन या Gurudwara reform movement

 पंजाब का गुरुद्वारा सुधार आन्दोलन क्या था. कैसे गुरुद्वारों को भ्रष्ट महंतो के चंगुल से आजाद कराया गया. इसमे अकालियों का त्याग और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी का गठन.  स्वतंत्रता आन्दोलन के दौरान राष्ट्रवाद और लोकतन्त्र के पक्ष में बह रही देश की हवा ने धीरे-धीरे देश के सामाजिक और धार्मिक मामलों को भी प्रभावित करना शुरू कर दिया. गाँधी जी के दिखाए अहिंसा और सत्याग्रह के रास्ते समाज के कमजोर वर्गों के लिए एक मजबूत हथियार बनकर सामने आए. धीरे-धीरे ज़न चेतना के संचार एवं विस्तार के परिणामस्वरूप भारत के सामाजिक और धार्मिक सुधार आन्दोलन देश के स्वतंत्रता आन्दोलन से जुड़ गए. दरअसल जैसे जैसे देश का राष्ट्रीय आन्दोलन आगे बढ़ रहा था वैसे- वैसे उपनिवेशवाद यानी Colonialism का आधार सिमट रहा था. ब्रिटिश अधिकारियों ने सामाजिक, सांस्कृतिक एवं आर्थिक रूप से प्रतिक्रियावादी शक्तियों का समर्थन हासिल करने का प्रयास करना शुरू कर दिया. इसका सबसे बड़ा उदाहरण है पंजाब का गुरुद्वारा सुधार आन्दोलन या अकाली आन्दोलन. एक धार्मिक आन्दोलन के रूप में शुरू हुआ अकाली आन्दोलन अन्त में भारत के स्वतंत्...

प्रोजेक्ट टाइगर

 भारत में चल रहे प्रोजेक्ट टाइगर ने 1973 में पहली बार देश के सामने टाइगर रिजर्व की अवधारणा को प्रस्तुत किया . कभी फॉरेस्ट अधिकारियों द्वारा  एक प्रशासनिक कदम से शुरुआत करने वाला टाइगर रिजर्व 2006 आते आते एक वैधानिक स्वरुप ले चुका था. आज भारत के बाघ संरक्षण योजना की पूरी दुनियाँ में सराहना हो रही है. बात करेंगे कि भारत में प्रोजेक्ट टाइगर की शुरुआत कब और कैसे हुई.1972 में देश के वन्यजीवों की सुरक्षा के मद्देनज़र एक नया कानून बनाया गया वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 यानी Wild Life Protection Act 1972 जिसके अंतर्गत Notified फॉरेस्ट एरिया में चिन्हित स्थानों पर नैशनल पार्क बनाए गए. यहाँ पर रह रहे वनवासियों के अधिकारों को समाप्त करके वे सारे अधिकार राज्य सरकारों को सौंप दिए गए. नए कानून के अंतर्गत कई वाइल्डलाइफ Sanctuaries भी बनाए गए जिसमें वनवासियों को कुछ सीमित अधिकारों का इस्तेमाल करने की इजाजत दी गयी. आज देश में बाघों की बढ़ती संख्या इस महान प्रयास का ही परिणाम है. इसी प्रयास का परिणाम है प्रोजेक्ट टाइगर. दोस्तों 1973 में करीब 1915 स्क्वेयर किलोमीटर एरिया में नौ टाइगर...

भारतीय न्याय संहिता 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023, भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023

  क्यों अंग्रेजों के जमाने के बनाए गए आपराधिक संहिता यानी क़ानूनों को संशोधित करने की जरूरत पडी . किन विषयों में परिवर्तन का लक्ष्य रखा गया है. सबसे मुख्य बात यह है कि किस तरह UAPA की आतंकवादी कार्यवाई की परिभाषा भारतीय न्याय संहिता 2023 की परिभाषा से अलग है.  केन्द्रीय गृहमंत्री ने   लोकसभा में तीन संशोधित बिलों को प्रस्तुत किया जो कि ब्रिटिश ज़माने के आपराधिक कानूनों यानी क्रिमिनल laws का स्थान लेंगे.दोनों सदनों से पारित होने के बाद इन बिलों को राष्ट्रपति की सहमति भी मिल गयी है इसी के साथ इन बिलों को अब कानून की हैसियत प्राप्त हो चुकी है. इसके पहले वाले version को जो अगस्त में प्रस्तुत हुआ था उसको वापस लेने के बाद य़ह संशोधित version प्रस्तुत किया गया है. अगस्त में प्रस्तुत बिल को 31 सदस्यों वाली संसद की स्टैंडिंग कमेटी को सौंपा गया था. तमाम विशेषज्ञों और दूसरे Stakeholders से सलाह मशविरे के बाद अंत में सात नवम्बर को इसे अंतिम रूप दिया गया. इंडियन पेनल कोड यानी IPC का स्थान लेगा भारतीय न्याय संहिता 2023. कोड ऑफ क्रिमिनल Procedures यानी CrPC का स्थान...