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दिसंबर, 2023 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

अनुच्छेद 370 पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला और इसका विश्लेषण

संविधान  के अनुच्छेद 370 को खत्म करने के सरकार के फैसले चुनौती दी गई थी सुप्रीम कोर्ट में इस 11 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति के 5 अगस्त 2019 के आदेश को सही ठहराया. सुप्रीम कोर्ट के फैसले का क्या असर भारतीय संघीय व्यवस्था पर पड़ेगा. फैसले के महत्तवपूर्ण पक्ष क्या हैं. केन्द्र राज्य संबंधों का इस पर क्या प्रभाव पड़ेगा. राष्ट्रपति शासन के दौरान राष्ट्रपति की क्या भूमिका होगी. जम्मू और कश्मीर को पूर्ण राज्य के दर्जे के संबंध में फैसले में क्या है.  दोस्तों केन्द्र सरकार ने 5 अगस्त 2019 को जम्मू और कश्मीर से संबंधित संविधान की धारा 370 को समाप्त करने की घोषणा की थी. इस फैसले के खिलाफ 23 याचिकाएं दायर की गयी थीं. जिन पर सुप्रीम कोर्ट में 16 दिन तक सुनवाई चली और सुप्रीम कोर्ट ने 5 सितंबर 2023 को सुनवाई पूरी करने के बाद अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया था. इस संवैधानिक पीठ मे चीफ जस्टिस श्री DY Chandrachurn के अलावा चार और Judges थे Justice SK कौल, जस्टिस संजीव खन्ना  जस्टिस BR Gawai, जस्टिस सूर्यकांत. गृह मंत्री अमित शाह ने 5 अगस्त 2019 को राज्यसभा में जम्म...

क्या होता है Optical फाइबर, कैसे काम करता है य़ह

 ज़न संचार के क्षेत्र में विज्ञान की तरक्की ने आश्चर्यजनक रूप से से आम लोगों के जीवन में क्रान्ति पैदा कर दिया है.आज मोबाइल फोन आम लोंगों की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है. इसके बगैर शायद एक कदम भी चलना मुश्किल है. Corona महामारी के दौरान हम सभी ने देखा कि वह एक चीज जिसने हम सभी को आपस में जोड़कर रखा था वह था इन्टरनेट. आज हाई स्पीड इन्टरनेट की वजह से वीडियो चैट कर सकते हैं, ऑनलाइन payment कर सकते हैं, Classes attend कर सकते हैं  और तो और मीटिंग्स कर सकते हैं. दोस्तों कभी सोचा है ये सब कैसे सम्भव हो पाता है. य़ह सबकुछ सम्भव हो पाता है Optical फाइबर से. य़ह Optical फाइबर वास्तव में है क्या. अखिरकार यह काम कैसे करता है. कैसे सम्भव हो पाता है य़ह सबकुछ.  Optical फाइबर वास्तव में बहुत ही महीन बेलनाकार काँच यानी ग्लास के धागे होते हैं. इनकी गोलाई हमारे आपके एक साधारण बाल के बराबर होती है. ये काँच के धागे आश्चर्यजनक रूप से शब्दों को, चित्रों को, वीडियो, टेलीफोन कॉल या कोई ऐसी चीज जिन्हें डिजिटल सूचना में Encode किया जा सकता है, को लंबी दूरी तक भेज सकते हैं वह भी...

एक राष्ट्र एक चुनाव-राष्ट्रपति शासन प्रणाली की ओर बढ़ते कदम

 यदि लोकसभा और देश के विभिन्न विधानसभाओं के चुनाव साथ साथ कराएँ जाएं तो क्या य़ह सम्भव होगा. इसमें क्या दिक्कतें आयेंगी? फायदे क्या होंगे. दोनों के अलग अलग चुनाव कराने से जैसा कि अभी हो रहा है क्या नुकसान होगा. अगर राज्य विधानसभाओं के चुनाव में प्रधानमंत्री, केन्द्रीय मंत्री और संसद सदस्य चुनाव प्रचार न करें तो क्या फायदा होगा.  एक बड़ा सवाल यह भी है कि लोकसभा और तमाम विधानसभाओं के साथ साथ चुनाव कराने के पीछे   इरादे  कुछ और ही है. दोस्तों एक सितंबर 2023 को केन्द्र सरकार ने पूर्व राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविद के नेतृत्व में एक छह सदस्यों का पैनल गठित किया है य़ह परीक्षण करने के लिए कि क्या लोकसभा, राज्य विधानसभाओं एवं स्थानीय निकायों के चुनाव साथ साथ कराएँ जा सकते हैं और यदि य़ह सम्भव हो तो इस सम्बन्ध में क्या जरूरी कदम हो सकते हैं. एक राष्ट्र-एक चुनाव या One Nation one election पर सुझाव देने के उद्देश्य से पैनल को जिम्मेदारी दी गई है कि वह परीक्षण करे कि क्या ज़रूरी संवैधानिक संशोधनों या दूसरे कानूनी कदम उठाने की आवश्यकता होगी . पैनल को य़ह भी देखना होगा...