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अल्पसंख्यकों के संवैधानिक अधिकार

भारत के संविधान में प्रदत्त अल्पसंख्यकों के विशेष अधिकारों की. किस तरह से धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यकों के शैक्षणिक और सांस्कृतिक अधिकारों को विशेष संवैधानिक प्रावधानों के माध्यम से सुरक्षा प्रदान की गयी है. दोस्तों आगे बढ़ने से पहले आप से एक छोटी सी गुजारिश यदि आपने अभी तक मेरे चैनल को subscribe नहीं किया है तो प्लीज़ इसको subscribe कर लीजिए और बेल icon को प्रेस कर दीजिए. आते हैं पॉइन्ट पर. दोस्तों सामाजिक और राजनैतिक क्षेत्रों में समानता और न्याय के दो आदर्श भारतीय संविधान के आधार स्तम्भ हैं. भारत का संविधान धर्म जाति जन्मस्थान के आधार पर किसी भी प्रकार के भेदभाव को प्रतिबन्धित करता है. यही कारण था कि भारत के संविधान में साम्प्रदायिकता के आधार पर किसी भी प्रकार के प्रतिनिधित्व को स्थान नहीं दिया गया फिर चाहे वह विधायिका हो या कार्यपालिका. दोस्तों समता और न्याय के संवैधानिक शब्द कहीं खोखले नारे साबित न हों इसलिए ऐसे प्रावधान बनाए गए जो वास्तव में समाज के सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े हुए लोंगों के उत्थान की दिशा में ठोस कदम साबित हों. जब तक सामाजिक Samatalikaran की दिशा ...

Destruction of Nalanda University

दोस्तों नमस्कार zedplus में आप का स्वागत है. आज बात करेंगे प्राचीन भारत के गौरव नालंदा विश्वविद्यालय की. कब हुई इसकी स्थापना, इसे किसने स्थापित किया , शिक्षा के क्षेत्र में इस बौद्ध विश्वविद्यालय के गौरवशाली योगदान की और अन्त में सबसे महत्त्वपूर्ण प्रश्न किसने नालंदा विश्वविद्यालय को नष्ट किया आक्रान्ता बख्तियार खिलजी ने या फिर कट्टरपंथी  ब्राह्मणों ने. दोस्तों आगे बढ़ने से पहले आप से एक छोटी सी गुजारिश यदि आपने अभी तक मेरे चैनल को subscribe नहीं किया है तो प्लीज़ इसको subscribe कर लीजिए और बेल icon को प्रेस कर दीजिए. आते हैं पॉइन्ट पर. दोस्तों प्राचीन भारत के गौरव नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना पांचवीं शताब्दी में पूर्व मगध के शासक कुमार गुप्त के शासनकाल के दौरान हुई. ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी से 500 साल पहले स्थापित नालंदा विश्वविद्यालय सम्भवतः पूरे विश्व का प्रथम इतना बृहत शिक्षा केंद्र था जहाँ दस हजार विद्यार्थी एक साथ रहकर बुद्धिवाद, तर्कशास्त्र, गणित, मेडिसन, और कई अन्य विषयों  का अध्ययन करते थे. कहा जाता है कि नालंदा विश्वविद्यालय के विशालकाय नौ मंजिला पुस्तकालय में 90 ला...

नालंदा महा विहार

दोस्तों नमस्कार zedplus में आप का स्वागत है. आज बात करेंगे प्राचीन भारत के गौरव नालंदा विश्वविद्यालय की. कब हुई इसकी स्थापना, किसने स्थापित किया , शिक्षा के क्षेत्र में इस बौद्ध विश्वविद्यालय के गौरवशाली योगदान की और अन्त में सबसे महत्त्वपूर्ण प्रश्न किसने नालंदा विश्वविद्यालय को नष्ट किया आक्रान्ता बख्तियार खिलजी ने या फिर कट्टरपंथी  ब्राह्मणों ने. दोस्तों आगे बढ़ने से पहले आप से एक छोटी सी गुजारिश यदि आपने अभी तक मेरे चैनल को subscribe नहीं किया है तो प्लीज़ इसको subscribe कर लीजिए और बेल icon को प्रेस कर दीजिए. आते हैं पॉइन्ट पर. दोस्तों प्राचीन भारत के गौरव नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना 427 से 450 ईशा पूर्व मगध के शासक कुमार गुप्त के शासनकाल के दौरान हुई. ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी से 500 साल पहले स्थापित नालंदा विश्वविद्यालय सम्भवतः पूरे विश्व का प्रथम इतना बृहत शिक्षा केंद्र था जहाँ दस हजार विद्यार्थी एक साथ रहकर बुद्धिवाद, तर्कशास्त्र, गणित, मेडिसन, और कई अन्य विषयों  का अध्ययन करते थे. कहा जाता है कि नालंदा विश्वविद्यालय के विशालकाय नौ मंजिला पुस्तकालय में 90 लाख से अधिक...