आज बात करेंगे अनुच्छेद 368 पर गोलक नाथ मामले की, 24वें संविधान संशोधन की, Keshwanand भारती मामले की और अंत में Minrva Milles मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले की. दोस्तों आगे बढ़ने से पहले आप से एक छोटी सी गुजारिश यदि आपने अभी तक मेरे चैनल को subscribe नहीं किया है तो प्लीज़ इसको subscribe कर लीजिए और बेल icon को भी प्रेस कर दीजिए. आते हैं पॉइन्ट पर. दोस्तों संविधान विशेषज्ञों के बीच एक विवाद खड़ा हो गया कि क्या अनुच्छेद 368 के अन्तर्गत बनाए गए कानून संविधान के दूसरे अनुच्छेद 13(2) के अनुरूप होने चाहिए. इसका अर्थ य़ह है कि क्या वह संविधान संशोधन असंवैधानिक होगा जो मौलिक अधिकारों को परिवर्तित करता है या उन्हें समाप्त करता है. दोस्तों गोलक नाथ फैसला आने से पहले यानी 1967 से पहले सुप्रीम कोर्ट की राय थी कि संविधान का कोई भी हिस्सा असंशोधनिय यानी Unamendable नहीं है. संसद अनुच्छेद 368 के अन्तर्गत सक्षम है कोई भी संविधान संशोधन विधेयक पारित करने के लिए जिसमें मौलिक अधिकार भी शामिल हैं. यहाँ तक कि संसद स्वयं अनुच्छेद 368 को भी संशोधित करने का अधिकार रखती है. सुप्रीम कोर्ट की य...
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