सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

जून, 2024 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

गोलक नाथ केस, 24th संविधान संशोधन, Keshwanand Bharati case, Minerva Milles केस

 आज बात करेंगे अनुच्छेद 368 पर गोलक नाथ मामले की, 24वें संविधान संशोधन की, Keshwanand भारती मामले की और अंत में Minrva Milles मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले की. दोस्तों आगे बढ़ने से पहले आप से एक छोटी सी गुजारिश यदि आपने अभी तक मेरे चैनल को subscribe नहीं किया है तो प्लीज़ इसको subscribe कर लीजिए और बेल icon को भी प्रेस कर दीजिए. आते हैं पॉइन्ट पर. दोस्तों संविधान विशेषज्ञों के बीच एक विवाद खड़ा हो गया कि क्या अनुच्छेद 368 के अन्तर्गत बनाए गए कानून संविधान के दूसरे अनुच्छेद 13(2) के अनुरूप होने चाहिए. इसका अर्थ य़ह है कि क्या वह संविधान संशोधन असंवैधानिक होगा जो मौलिक अधिकारों को परिवर्तित करता है या उन्हें समाप्त करता है. दोस्तों गोलक नाथ फैसला आने से पहले यानी 1967 से पहले सुप्रीम कोर्ट की राय थी कि संविधान का कोई भी हिस्सा असंशोधनिय यानी Unamendable नहीं है. संसद अनुच्छेद 368 के अन्तर्गत सक्षम है कोई भी संविधान संशोधन विधेयक पारित करने के लिए जिसमें मौलिक अधिकार भी शामिल हैं. यहाँ तक कि संसद स्वयं अनुच्छेद 368 को भी संशोधित करने का अधिकार रखती है. सुप्रीम कोर्ट की य...

अनुच्छेद 368 .संविधान संशोधन

आज का टॉपिक है संविधान के अनुच्छेद 368 की जो संसद को संविधान संशोधन का अधिकार देता है. दोस्तों आगे बढ़ने से पहले आप से एक छोटी सी गुजारिश यदि आपने अभी तक मेरे चैनल को subscribe नहीं किया है तो प्लीज़ इसको subscribe कर लीजिए और बेल icon को प्रेस कर दीजिए. आते हैं पॉइन्ट पर. दोस्तों संविधान संशोधन पर चर्चा के दौरान संविधान सभा में प्रधानमंत्री नेहरू ने कहा था कि संविधान इतना कठोर नहीं होना चाहिए कि राष्ट्रीय विकास और परिवर्तनशील आवश्यकताओं का समायोजन न कर सके. डॉ अम्बेडकर ने कहा कि जो लोग संविधान से सन्तुष्ट नहीं हैं उन्हें सिर्फ दो तिहाई बहुमत हासिल करना है और यदि वे देश की संसद में दो तिहाई बहुमत नहीं प्राप्त कर सकते तो इसका मतलब साफ़ है कि देश की जनता उनके इरादों में उनके साथ नहीं है. दोस्तों आम तौर पर संघीय व्यवस्था में संविधान संशोधन की जिम्मेदारी किसी विशेष संस्था को दी जाती है न कि संसद को या संविधान संशोधन के लिए एक कठिन प्रक्रिया का पालन करना होता है  ताकि संघीय संसद की इच्छानुसार संघ और राज्यों के बीच सम्बन्ध प्रभावित न हों. दोस्तों भारत के संविधान निर्माता संसद...

चाबहार समझौता

  भारत और ईरान के बीच 13 मई 2024 ek हुआ समझौता जिसके अंतर्गत अगले 10 वर्षों तक भारत चाबहार बंदरगाह को विकसित करने के साथ साथ इसका संचालन भी करेगा. ईरान के sistan-बलूचिस्तान प्रान्त में स्थित देश के विभाजन के पहले भारत के ठीक दरवाजे पर था. य़ह वह स्थान है जहां पर हिंदुस्तानी ऊर्दू  बड़े अच्छे से बोली और समझी जाती है. यही वह जगह है जहाँ कभी पंचतंत्र को उसके फ़ारसी अनुवाद में बड़े चाव से पढ़ा जाता था. दोस्तों भारत की स्वतंत्रता के बाद और ईरान के 1979 की इस्लामिक क्रान्ति के पहले दोनों देशों के सम्बन्ध बहुत मधुर नहीं रहे. कारण था ईरान के शाह का अमेरिका की तरफ विशेष झुकाव और भारत की गुट निरपेक्ष नीति. वैसे 1970 के दशक में ही ईरान के शाह ने चाबहार बन्दरगाह को विकसित की आवश्यकता पर विचार व्यक्त किया इसका मुख्य कारण था यहां का अनुकूल मौसम और गर्म जल का बन्दरगाह होने के साथ साथ य़ह हिंद महासागर में ईरान का इकलौता प्रवेश द्वार है. विशेष बात यह है कि भू - रणनीति दृष्टिकोण यानी Geo-Stratgic Point of view से महत्तवपूर्ण ओमान की खाड़ी और Harmuj जलसन्धि के बीचो बीच स्थित है. दोस्...